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राजस्थान के इतिहास की महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ

कालीबंगा नोट्स
प्रमुख पुरातात्विक स्थल एवं महाजनपद 1. कालीबंगा 1. 👉🏻 यह एक काँस्ययुगीन सभ्यता है। 👉🏻 कालक्रम 2350 ई.पू. से 1750 ई.पू. (कार्बन डेटिंग पद्धति के अनुसार) 👉🏻 यह पुरास्थल हनुमानगढ़ जिले में प्राचीन सरस्वती/दृषद्वती नदी (वर्तमान में घग्घर) के बाएँ तट पर स्थित है। 👉🏻 खोज - वर्ष 1952 में अमलानंद घोष द्वारा। 👉🏻 उत्खनन वर्ष 1961-1964 के मध्य बी. बी. लाल, बी. के. थापर, जे.वी. जोशी, एम.डी. खरे, के. एम. श्रीवास्तव तथा एस.जी. जैन द्वारा। 👉🏻 यहाँ उत्खनन के लिए दो टीलों को चुना गया, जो समतल भूमि से 12 मीटर की ऊँचाई पर थे। ये दोनों टीले सुरक्षात्मक दीवार से घिरे हुए थे। 👉🏻 उत्खनन से प्राप्त काले रंग की चूड़ियों के कारण कालीबंगा नामकरण हुआ। 👉🏻 यह नगरीय सभ्यता थी। 👉🏻 इसका 5 स्तरों तक उत्खनन किया गया। 👉🏻 प्रथम दो स्तर तो हड़प्पा सभ्यता से भी प्राचीन हैं, वहीं तीसरा, चौथा व पाँचवाँ स्तर हड़प्पा सभ्यता के समकालीन है। 👉🏻 इस आधार पर इसे दो भागों में बाँटा गया है - (1) प्राक् हड़प्पा सभ्यता (2) हड़प्पा सभ्यता प्राक् हड़प्पा या पूर्व हड़प्पा कालीन चरण - 👉🏻 हड़प्पा व मोहनजोदड़ो के दुर्गों की तरह यहाँ पर भी दुर्ग पश्चिम में तथा आवास क्षेत्र पूर्व में स्थित हैं। 👉🏻 रक्षा प्राचीरों से दुर्ग व निचले नगर के घिरे होने का स्पष्ट साक्ष्य मिला है। 👉🏻 नगर निर्माण - समचतुर्भुजाकार मिट्टी की 'रक्षा प्राचीर' के अंदर आवासों का निर्माण। 👉🏻 'सूर्यतपी ईंटों' से दीवारें बनती थी और इन्हें मिट्टी से जोड़ा जाता था। 👉🏻 मार्ग की चौड़ाई 5-5.5 मीटर। 👉🏻 नगर की सड़कें पक्की थी। 👉🏻 आवास - कच्ची ईंटों (30×15×7.5 सेमी.) से निर्मित। 👉🏻 मकानों में दालान, चार-पाँच बड़े कमरे व कुछ छोटे कमरे और मकानों के आगे चबूतरे भी रहते थे। 👉🏻 कमरों की फर्श को चिकनी मिट्टी से लीप दिया जाता था। कहीं-कहीं पकाई गई ईंटों के फर्श भी दिखाई देते हैं। 👉🏻 मकानों की छत मिट्टी से निर्मित होती थीं, जिनको लकड़ी की बल्लियों से बनाया जाता था। 👉🏻 मकानों की नालियाँ, शौचालय, भट्टियों व कुओं में पकी हुई ईंटों का प्रयोग किया गया। 👉🏻 कालीबंगा का एक फर्श, हड़प्पाकाल का एकमात्र ऐसा उदाहरण है जहाँ अलंकृत ईंटों का प्रयोग हुआ है। 👉🏻 जल निकास प्रणाली - लकड़ी की नाली के अवशेष प्राप्त। 👉🏻 गंदे पानी को निकालने के लिए विशेष प्रकार के गोलाकार भांड होते थे। मृद्भांड - विशेष प्रकार के पात्र राजस्थान में सर्वप्रथम सौंथी से प्राप्त हुए हैं, इसलिए इन्हें 'सौंथी मृद्भांड परंपरा' नाम दिया गया। 👉🏻 यहाँ से प्राप्त हड़प्पाकालीन मृद्भांडों को 6 उपभागों में विभाजित किया गया है। इनमें विभिन्न प्रकार के घड़े, तश्तरियाँ, लघु पात्र एवं कटोरे प्रमुख हैं। 👉🏻 यहाँ से प्राप्त मिट्टी के बर्तन एवं उनके अवशेष पतले एवं हल्के हैं तथा उनमें सुन्दरता व सुडौलता का अभाव है। कृषि - जुते हुए खेतों के अवशेष प्राप्त। संस्कृत साहित्य में उल्लिखित 'बहुधान्यदायक क्षेत्र' यही था। 👉🏻 घग्घर नदी के बाएँ किनारे पर स्थित खेत तीसरी सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व के हैं, संसार भर में उत्खनन से प्राप्त खेतों में यह पहला है। 👉🏻 खेत में ग्रिड पैटर्न की गर्तधारियों के निशान हैं जो एक-दूसरे के समकोण पर बने हुए हैं। 👉🏻 दो तरह की फसलों (चना व सरसों) को एक साथ उगाया जाता था। विकसित हड़प्पा या हड़प्पाकालीन चरण - 👉🏻 विशिष्ट लोगों के निवास हेतु मुख्य प्रासाद तथा साधारण जनता के लिए निम्न प्रासाद का निर्माण जो एक-दूसरे से 40 मीटर चौड़े मार्ग द्वारा विभाजित हैं। 👉🏻 सात अग्निवेदिकाएँ प्राप्त हुईं, जो आयताकार हैं। 👉🏻 डॉ. दशरथ शर्मा ने कालीबंगा को 'सैंधव सभ्यता की तीसरी राजधानी' कहा है। 👉🏻 लिपि सैंधव लिपि। इसे पढ़ा नहीं जा सका है। यह लिपि दायीं से बायीं ओर लिखी जाती थी। 👉🏻 मुहरें - यहाँ मिट्टी से बनी सर्वाधिक मुद्राएँ अथवा मुहरें मिली हैं। यहाँ से प्राप्त बेलनाकार मुहरें मेसोपोटामिया की मुहरों जैसी हैं। मूर्तिकला - वृषभाकृति, मिट्टी से बना कुत्ता, भेड़िया, चूहा और हाथी 👉🏻 की प्रतिमाएँ मिली हैं। अंत्येष्टि क्रिया एवं चिकित्सा - 👉🏻 अंत्येष्टि संस्कार की तीनों विधियों पूर्ण समाधीकरण, आंशिक समाधीकरण एवं दाह संस्कार के साक्ष्य मिले हैं। 👉🏻 एक युगल शवाधान तथा अंडाकार कब्रें भी प्राप्त हुई हैं। 👉🏻 एक बच्चे के कंकाल की खोपड़ी में 6 छिद्र मिले हैं, जिसे मस्तिष्क शोध बीमारी के ईलाज का प्रमाण माना जाता है। यह शल्य क्रिया का प्राचीनतम उदाहरण है। 👉🏻 2600 ईसा पूर्व भूकंप की जानकारी उत्खनन से प्राप्त हुई, जो 'भूकंप का प्राचीनतम साक्ष्य' है। 👉🏻 संभवतः घग्घर नदी के सूखने से कालीबंगा का विनाश हुआ। 👉🏻 कालीबंगा को 'दीन-हीन बस्ती' भी कहा जाता है। 👉🏻 कालीबंगा में मातृसत्तात्मक परिवार की व्यवस्था विद्यमान थी। 👉🏻 कालीबंगा सैंधव सभ्यता का एकमात्र ऐसा स्थल है, जहाँ से मातृदेवी की मूर्तियाँ प्राप्त नहीं हुई हैं। 👉🏻 वर्ष 1961 में कालीबंगा अवशेष पर भारत सरकार द्वारा 90 पैसे का डाक टिकट जारी किया गया। 👉🏻 राज्य सरकार द्वारा कालीबंगा से प्राप्त पुरा अवशेषों के संरक्षण हेतु वर्ष 1985-86 में एक संग्रहालय की स्थापना की गई।

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