पठार

  • पठार भूपटल के द्वितीय श्रेणी के उच्चावच के प्रमुख उदाहरण है। पठार पृथ्वी की सतह के लगभग 18 प्रतिशत भाग को घेरे हुए हैं। पठार एक बहुत विस्तृत ऊँचा भू-भाग है, जिसका सबसे ऊपर का भाग पर्वत के विपरीत लम्बा-चौड़ा और लगभग समतल होता है।
  • पठारी क्षेत्र में बहने वाली नदियाँ पठार पर प्रायः गहरी घाटियाँ और महाखड्डु बनाती हैं। इस प्रकार पठार का मौलिक समतल रूप कटा-फटा या ऊबड़-खाबड़ हो जाता है। फिर भी पठार आसपास के क्षेत्र या समुद्र तल से काफी ऊँचा होता है।
  • पठार की ऊँचाई समुद्रतल से 600 मीटर ऊपर मानी जाती है। परन्तु तिब्बत और बोलीविया जैसे पठार समुद्र तल से 3600 मीटर से भी अधिक ऊँचे हैं।
  • पठार आस-पास की भूमि से ऊँचा उठा हुआ वह विस्तृत भू-भाग है, जिसका पृष्ठ लगभग समतल होता है तथा जिसके किनारों का ढाल कभी-कभी बिल्कुल खड़ा होता है।

पठारों का वर्गीकरण –

भौगोलिक स्थिति एवं संरचना के आधार पर पठारों को पाँच श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-

1. अन्तरा पर्वतीय पठार

2. गिरिपद पठार

3. महाद्वीपीय पठार

4. गुम्बदाकार पठार

5. ज्वालामुखी पठार

1. अन्तरा पर्वतीय पठार

चारों ओर से ऊँची पर्वत श्रेणियों से पूरी तरह या आंशिक रूप से घिरे भू-भाग को अन्तरा पर्वतीय पठार कहते हैं।

उर्ध्वाधर हलचलें लगभग क्षैतिज संस्तरों वाली शैलों के बहुत बड़े भू-भाग को समुद्रतल से हजारों मीटर ऊँचा उठा देती है। संसार के अधिकांश ऊँचे पठार इसी श्रेणी में आते हैं। इनकी औसत ऊँचाई 3,000 मीटर है। तिब्बत का विस्तृत एवं 4,500 मीटर ऊँचा पठार ऐसा ही एक उदाहरण है। यह वलित पर्वत जैसे हिमालय, काराकोरम, कुनलुन, तियनशान से घिरा हुआ है। कोलोरेडो दूसरा चिर परिचित उदाहरण है जो एक किलोमीटर से अधिक ऊँचा है, जिसे नदियों ने ग्रैंड केनियन तथा अन्य महाखड्डों में काट दिया है। मैक्सिको, बोलीविया, ईरान और हंगरी इसी प्रकार के पठार के अन्य उदाहरण है।


2.गिरिपद (पीडमांट) पठार

  • पर्वत के पदों में स्थित अथवा पर्वतमाला से जुड़े हुए पठारों को जिनके दूसरी ओर मैदान या समुद्र हो, गिरिपद पठार कहलाते हैं।
  • इन पठारों का क्षेत्रफल प्रायः कम होता है। इन पठारों का निर्माण कठोर शैलों से होता है।
  • भारत में मालवा का पठार, दक्षिण अमेरिका में पैटागोनिया का पठार जिसके एक ओर अटलांटिक महासागर है और संयुक्त राज्य अमेरिका में अप्लेशियन पर्वत और अटलांटिक तटीय मैदान के बीच अप्लेशियन पठार इसके उदाहरण हैं।
  • ये किसी समय बहुत ऊँचे थे परन्तु अब अपरदन के बहुत से कारकों द्वारा घिस दिए गए हैं। इसी कारण इन्हें अपरदन के पठार भी कहा जाता है।


3. महाद्वीपीय पठार

धरातल के एक बहुत बड़े भाग के ऊपर उठने या बड़े भू-भाग पर लावा की परतों के काफी ऊँचाई तक जाने से महाद्वीपीय पठारों का निर्माण होता है।

  • महाराष्ट्र का लावा पठार, उत्तर-पश्चिम संयुक्त राज्य अमेरिका में स्नेक नदी पठार, इस प्रकार के पठारों के उदाहरण हैं। इनको निक्षेपण के पठार भी कहते हैं।
  • महाद्वीपीय पठार अपने आस-पास के क्षेत्रों तथा समुद्र तल से स्पष्ट ऊँचे उठे दिखते हैं। इस प्रकार के पठारों का विस्तार सबसे अधिक है।
  • ब्राजील का पठार, अरब का पठार, स्पेन, ग्रीनलैण्ड और अंटार्कटिका के पठार, अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया के पठार महाद्वीपीय पठारों के उदाहरण हैं।

4. गुंबदाकार पठार

  • वलन की क्रिया द्वारा जब स्थलखंड में इस तरह का उत्थान हो जाता है कि बीच का भाग ऊँचा होता है तथा किनारे वाले भाग गोलाकार होते है, तो उसे ‘गुम्बदाकार पठार’ कहा जाता है।
  • गुम्बदाकार पठार तथा पर्वत में अन्तर यह होता है कि प्रथम अधिक विस्तृत, परंतु कम ऊँचा होता है। ज्वालामुखी उद्गार के समय भी भूपटल में विस्तृत उभार के कारण गुम्बदाकार पठारों का निर्माण हो सकता है।
  • भारत के छोटानागपुर के पठार को गुम्बदाकार पठार का उदाहरण बताया जा सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका का ओजार्क पठार इस तरह के पठार का सर्वोत्तम उदाहरण है।

5. ज्वालामुखी पठार

ज्वालामुखी उद्गार के कारण विस्तृत लावा प्रवाह के फलस्वरूप क्रमिक रूप में लावा के परत के ऊपर परत जमने से स्थलखण्ड समीपी सतह से ऊँचा हो जाता है तथा लावा पठार का निर्माण होता है।

  • ज्वालामुखी के दरारी उद्गार के कारण निर्मित पठार के उदाहरण न्यूज़ीलैण्ड, दक्षिणी अफ्रीका, उत्तरी तथा दक्षिणी अर्जेंटीना, ब्राजील, पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस तथा साइबेरिया में मिलते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलम्बिया का पठार, लावा निर्मित पठार का सर्वोत्तम उदाहरण है।
  • चारों ओर से ऊँची श्रेणियों से घिरे पठारों को अन्तरा पर्वतीय पठार कहते हैं।
  • धरातल के विस्तृत भू-भाग के ऊपर उठने अथवा लावा की परतों के जम जाने से बने पठार महाद्वीपीय पठार कहलाते हैं।
  • पर्वत की तलहटी में स्थित पठार जिनके दूसरी ओर समुद्र या मैदान हो गिरिपद पठार कहलाते हैं।
  •  

बहिर्जनित शक्तियों द्वारा निर्मित पठार

हिमानीकृत पठार

  • विस्तृत हिमानी पर्वतीय भागों को अपने अपरदन कार्य द्वारा घिसकर सपाट पठार का निर्माण करते हैं।
  • अण्टार्कटिका तथा ग्रीनलैण्ड में हिमानियों ने अपरदन द्वारा अनेक विस्तृत पठारों का निर्माण किया है। भारत के गढ़वाल पठार का निर्माण हिमानी द्वारा अपरदन के कारण ही हुआ है।
  • निम्न स्थानों पर हिमानी अपने हिमोढ़ के निक्षेप द्वारा स्थलखंड को ऊँचा करके छोटे पठारों का निर्माण करता है।

पवनकृत पठार

पवनें अपने साथ मिट्टी के बारीक कण उड़ाकर लाती है तथा उनको सुनिश्चित स्थान पर निक्षेप कर देती है।

इस तरह लम्बे समय तक निक्षेप के कारण मिट्टियाँ शैल में बदल जाती है और पठार का निर्माण हो जाता है। पाकिस्तान का पोटवार का पठार तथा चीन का लोयस का पठार इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

जलकृत पठार

  • नदियों द्वारा तलछट के निक्षेप द्वारा स्थलखण्ड ऊँचा होता रहता है। तलछटीय जमाव के कारण अधिक भाग तलछट शैल में परिवर्तित होते रहते हैं।
  • भू-हलचल के कारण ये भाग समीपी सतह में ऊँचे उठ जाते है तथा पठार का निर्माण हो जाता है। भारत के विंध्य पठार, चेरापूंजी पठार तथा बर्मा (म्यांमार) के शान पठार इसी तरह निर्मित पठार के उदाहरण हैं।

अपरदन चक्र के आधार पर पठारों का वर्गीकरण –

 

1 . तरुण पठार –

इस प्रकार के पठार पर अपरदन की क्रिया काफी सक्रिय तथा चट्टानों की संरचना क्षैतिज होती है। नदियाँ निम्न कटाव द्वारा गहरी घाटियों का निर्माण करती है। जैसे- कोलोरेडो तथा इदाहो का पठार (संयुक्त राज्य अमेरिका)।

 2 प्रौढ़ अवस्था –

प्रौढ़ावस्था में अपरदन द्वारा पठार की सतह इतनी ऊबड़-खाबड़ तथा असमान हो जाती है कि नुकीली चोटियों का अधिक संख्या में विस्तार हो जाता हैं। इसी आधार पर कुछ लोग प्रौढ़ पठार को पहाड़ कह देते हैं। जैसे- अप्लेशियन पठार (संयुक्त राज्य अमेरिका)।

3. जीर्ण पठार –

अत्यधिक अपरदन के बाद पठार के उच्चावच घिसकरप्रायः समाप्त हो जाते है तथा पठार एक पैनीप्लेन के रूप में परिवर्तित हो जाता है। उच्चावच के अवशिष्ट भाग मेसा तथा बुटी के रूप में दिखाई पड़ते हैं। नदियाँ उथली घाटियों से होकर प्रवाहित होती है। वास्तव में मेसा जीर्ण पठार का सर्वप्रथम लक्षण है। जैसे- मध्य राँची का पठार।

मानव जीवन में पठारों का महत्त्व –

लम्बे समय से लगातार अपरदन के कारण पठार के तल प्रायः असमतल हो गए हैं, जिसके कारण यहाँ आवागमन के साधनों तथा जनसंख्या का पर्याप्त विकास नहीं हो पाता। फिर भी पठार मानव के लिए बहुत उपयोगी हैं।

1.खनिजों के भण्डार – विश्व के अधिकांश खनिज पठारों से ही प्राप्त होते हैं, जिन खनिजों पर हमारे उद्योग कच्चे माल के लिए निर्भर हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पठार में सोना, अफ्रीका के पठार में ताँबा, हीरा और सोना तथा भारत के पठार में कोयला, लोहा, मैंगनीज और अभ्रक के विशाल भंडार हैं।

2. जल विद्युत उत्पादन – पठारों के ढालों पर नदियाँ जल प्रपात बनाती है। ये जल प्रपात जल विद्युत उत्पादन के आदर्श स्थल हैं।

3. ठंडी जलवायु – उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पठारों के ऊँचे भाग ठण्डी जलवायु के कारण यूरोपवासियों को आकर्षित करते रहे, जहाँ रहकर उन्होंने अर्थव्यवस्था का विकास किया। उदाहरणार्थ दक्षिण और पूर्व अफ्रीका का क्षेत्र।

4. पशु-चारण के लिए उपयोगी – पठारी भाग पशुचारण के लिए बहुत उपयोगी हैं। ये भेड़, बकरियों के पालन के लिए बहुत उपयोगी है। भेड़, बकरियों से वस्त्रों के लिए ऊन तथा भोजन के लिए दूध और मांस की प्राप्ति होती है। लावा से बने पठार उपजाऊ हैं। अतः उन पर अन्य पठारों की अपेक्षा कृषि का अधिक विकास हुआ है।

Note – पठार अपने खनिज पदार्थों एवं उनके आसानी से दोहन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। जलविद्युत उत्पादन के लिए अनुकूल है। उनकी उपयुक्त जलवायु और कभी-कभी उपजाऊ मृदा पशुपालन और कृषि के लिए सहायक है।

 

एशिया

तिब्बत का पठार

  • यह पठार चीन देश में स्थित है। यह विश्व का सबसे ऊँचा पठार है, इसकी औसत ऊँचाई 5,000 मीटर है।
  • यह क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से विश्व का सबसे बड़ा पठार है।
  • यह एक अंतरापर्वतीय पठार है, जो हिमालय व कुनलुन, तियान शान पर्वतों के मध्य स्थित है।
  • इस पठारी क्षेत्र में अनेक छोटी-बड़ी झीलें स्थित हैं जिनमें प्रमुख झीलें मानसरोवर झील व राक्षस झील है।
  • इस पठारी क्षेत्र में अनेक ऊँची-ऊँची पर्वत चोटियाँ व हिमानियाँ स्थित हैं। जिनसे अनेक नदियों का उद्गम होता है। यहाँ बोखर खू हिमनद से सिन्धु नदी का उद्गम होता है।
  • चेमायुंगडुंग हिमनद से ब्रह्मपुत्र/दिहांग नदी का उद्गम होता है। राकस झील से सतलुज नदी का उद्गम होता है।

पामीर का पठार

यह पठार चीन में स्थित है अधिक ऊँचा होने के कारण इसे ‘विश्व की छत’ कहा जाता है।

यह एशिया महाद्वीप की विभिन्न पर्वत श्रेणियों का मिलन बिन्दु है इसलिए इसे पामीर ग्रंथि/गांठ भी कहा जाता है।

ईरान का पठार

यह ईरान में स्थित एक अंतरापर्वतीय पठार है। यह पठार एल्बुर्ज पर्वत व जाग्रोस पर्वत के मध्य स्थित है। यह एक शुष्क पठार है।

इस पठारी भाग के उत्तर में दश्त-ए-काबिर तथा दक्षिण दिशा में दश्त-ए-लूट मरुस्थल स्थित है।

अनातोलिया का पठार

  • यह पठार तुर्कीये (पूर्व नाम तुर्की या टर्की) में स्थित एक अंतरापर्वतीय पठार है।
  • यह पठार पौंटिक पर्वत व टौरस पर्वत के मध्य में स्थित है। इस पठारी क्षेत्र पर तुर्कीये की राजधानी अंकारा स्थित है।
  • यह एक शुष्क पठार है। इस पठारी क्षेत्र पर विश्व की सबसे खारी झील वॉन झील स्थित है। यह पठार खनिजों के दृष्टिकोण से सम्पन्न है।

शान का पठार

  •  यह पठार म्यांमार देश में स्थित है।
  • यह पठार खनिजों से संपन्न है।
  • इस पठारी क्षेत्र में कीमती पत्थर जैसे नीलम, माणिक व पन्ना मिलते हैं।
  • यह पठारी क्षेत्र इरावदी व सालविन नदियों के मध्य में स्थित है।

पोटवार का पठार

यह पठार पाकिस्तान देश के उत्तरी भाग में हिन्दुकुश पर्वत के दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है। यह एक शुष्क पठार है।

इस पठारी क्षेत्र मे पेशावर व इस्लामाबाद नगर स्थित है।

कोराट पठार

इसे नेखेन रटचा सीमा भी कहा जाता है। यह उत्तर-पूर्वी थाईलैण्ड का पठार है।

इस पठारी क्षेत्र की प्रमुख नदी चाओफ्राया नदी है। इस पठारी क्षेत्र में चावल की खेती की जाती है।

तकलामाकन का पठार

चीन के तारिम बेसिन क्षेत्र में स्थित उच्च भूमि, जुंगेरियन बेसिन, तारिम बेसिन व तियनशान पर्वत के उत्तरी क्षेत्र में स्थित है।

दक्कन का पठार

दक्कन का पठार प्राचीन गौंडवाना लैंड का भाग है।

यह दक्षिणी भारत में स्थित है।

छोटा नागपुर पठार

भारत में स्थित दक्कन का पठार का उत्तर-पूर्वी भाग है। इसे भारत का रूर प्रदेश भी कहा जाता है।

मंगोलिया का पठार

चीन व मंगोलिया के क्षेत्र में स्थित है। गोबी मरुस्थल इसके दक्षिण में विस्तृत है।

यूनान का पठार

चीन के दक्षिण-पूर्वी भाग में विस्तृत यूनान का पठार टिन, लोहा, कोयला व अन्य खनिज संसाधनों से सम्पन्न है।

 

अफ्रीका

कटंगा का पठार

  • यह पठार लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो व जांबिया देश में अवस्थित है।
  • इस पठार से लुआलाबा नदी के रूप में कांगो /जायरे नदी का उद्गम होता है।
  • यह पठार ताँबा, यूरेनियम व कोबाल्ट के भण्डारों हेतु प्रसिद्ध है।

जोस का पठार

यह पठार नाइजीरिया देश के उत्तरी भाग व नाइजर देश में फैला है।

यह पठार टिन के भण्डार से समृद्ध है।

मलागासी का पठार

यह पठार मेडागास्कर देश में स्थित है। यह पठार ज्वालामुखी शैलों से निर्मित है। इस पठार की औसत ऊँचाई 1000 से 1500 मीटर है।

ग्रेट कारू पठार

यह पठार दक्षिणी अफ्रीका देश में स्थित है। यह लावा से निर्मित पठार है। इस पठारी क्षेत्र में कोयला, सोना व हीरे के भण्डार पाए जाते हैं।

इथोपिया का पठार

  • यह पठार इथोपिया व जिबूती देश में स्थित है। इस पठारी क्षेत्र में अनेक खारे व मीठे पानी की झीलें पाई जाती है। यहाँ जिबूती देश में स्थित असाल झील एक खारे पानी की झील है।
  • यह अफ्रीका का निम्नतम भाग माना जाता है।
  • इस पठार पर इथोपिया देश में मीठे पानी की टाना झील स्थित है
  • जिससे नील नदी का उद्गम होता है। यह पठार एक शुष्क पठार है।

बाई का पठार

यह पठार अंगोला देश में स्थित है यहाँ अरीय प्रकार का अपवाह तंत्र पाया जाता है। यह पठार बॉक्साइट खनिज से संपन्न है। इस पठारी क्षेत्र से जेम्बेजी नदी का उद्गम होता है।

फूटा जलोन पठार

यह पठार गिनी देश में स्थित है। इस पठारी क्षेत्र से गैम्बिया व सेनेगल नदियों का उद्गम होता है। इस पठार की औसत ऊँचाई 900 मीटर है।

अबीसीनिया

पूर्वी अफ्रीका के इथोपिया में स्थित आग्नेय चट्टानों से निर्मित एक पठार, जिसकी सर्वोच्च चोटी रासदशान है।

टांगा नीका पठार

अफ्रीका महाद्वीप के तंजानिया में टांगानिका झील के पूर्व में स्थित बेसाल्ट पठार।

अदामावा का पठार

नाइजीरिया व कैमरून की सीमा पर अवस्थित इस पठारी भाग से अनेक नदियों का उद्गम होता है।

तासिली का पठार

अल्जीरिया के पूर्वी भाग में अवस्थित तासिली का पठार पर्वतपदीय पठार है।

उबांगी पठार

अदामावा पठार के पूर्वी भागों में सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक क्षेत्र में उच्च पठारी भाग है।

अहाग्गार का पठार

अल्जीरिया, लीबिया व नाइजर के मध्यवर्ती क्षेत्रों में स्थित यह पठार एक पर्वतीय पठार है।

उत्तरी अमेरिका

कोलोरेडो पठार

  • यह पठार संयुक्त राज्य अमेरिका देश के कैलिफॉर्निया प्रांत में स्थित है। इस पठार की ऊँचाई 1500 से 3000 मीटर है। यह एक अंतरापर्वतीय पठार है।
  • इस पठारी क्षेत्र में कोलोरेडो नदी के कटाव की क्रिया द्वारा ग्रैंड कैनियन का निर्माण किया गया है।
  • यह पठार पश्चिम में वास्य व यूनिटास पर्वतों तथा पूर्व में रॉकी पर्वतमाला के मध्य में स्थित है। यह एक शुष्क पठार है।

ओजार्क पठार

  • यह पठार संयुक्त राज्य अमेरिका में मिसौरी व अर्कान्सस प्रांत में स्थित है।
  • यह गुंबदाकार पठार का उदाहरण है।

कोलंबिया का पठार

  • यह लावा निर्मित पठार है जो फिशर उद्गार से बना है। अतः इसमें लावा की मोटी परत पाई जाती है।
  • यह एक उपजाऊ क्षेत्र है. जिसमें कोलंबिया व स्नेक नदियाँ प्रवाहित होती हैं।
  • यह पठारी क्षेत्र तटीय श्रेणी तथा रॉकी पर्वत के मध्य में स्थित है।
  • इस पठारी क्षेत्र में काली मिट्टी पाई जाती है, जिसमें कपास की खेती की जाती है।

यूकॉन पठार

  • यह पठार संयुक्त राज्य अमेरिका के अलास्का में स्थित है, जिसके उत्तर में ब्रुक्स रेंज तथा दक्षिण में अलास्का रेंज है।
  • इसका ढलान पश्चिम की ओर है तथा यह पठार यूकॉन व कुस्कोविन नदियों द्वारा विच्छेदित है।

ब्रिटिश कोलंबिया का पठार

  • यह पठार कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में स्थित है।
  • इसके पश्चिम में केनेडियन कोस्ट रेंज तथा पूर्व में रॉकी पर्वत है।
  • यह पठार 450 किलोमीटर चौड़ा है तथा इसकी औसत ऊँचाई 900 मीटर है।

कनाडियन शील्ड

  • इसे लॉरेशियन शील्ड भी कहा जाता है। इसकी रचना कैंब्रियन पूर्व महाकल्प में हुई थी और यह विश्व के प्राचीनतम कठोर स्थलखंडों में से एक है।
  • यह पठार कनाडा देश के आधे से भी अधिक भाग पर फैला हुआ है।
  • यह शील्ड खनिज पदार्थों की दृष्टि से अत्यंत धनी है। इस शील्ड पर विभिन्न प्रकार की स्थलाकृतियों का निर्माण हुआ है, जिनमें अवशिष्ट पहाड़, हिमानी निक्षेप द्वारा बनी पहाड़ियाँ व झीलें आदि प्रमुख हैं।
  • इस पठारी क्षेत्र में सोना, चाँदी, निकल व लौह अयस्क पाए जाते हैं।

एडवर्डस पठार

संयुक्त राज्य अमेरिका के टेक्सास प्रान्त में पेकोज नदी के पूर्व स्थित एक पर्वत पदीय पठार है।

कम्बरलैण्ड पठार

संयुक्त राज्य अमेरिका के टेनेसी प्रान्त में अप्लेशियन पर्वत के उत्तर-पश्चिमी में स्थित एक पठार जहाँ टेनेसी घाटी क्षेत्र में बिटुमिनस कोयले का प्रचुर भण्डार है।

लोरेशिया पठार

लेब्राडोर प्रायद्वीप में अवस्थित यह प्रठार कनैडियन शील्ड का भाग है यह पठार खनिज संसाधन सम्पन्न है। यहाँ लौह अयस्क मिलता है।

मैक्सिको का पठार

  • पश्चिमी तथा पूर्वी सियरा माद्रे पर्वत श्रेणियों के मध्य मैक्सिको में अवस्थित पठार है।
  • इस पठार पर गर्म एवं शुष्क परिस्थितियाँ पाई जाती है।

दक्षिणी अमेरिका

बोलीविया का पठार

  • यह पठार बोलीविया देश में एण्डीज पर्वत के मध्य में स्थित एक अन्तरापर्वतीय पठार है। इस पठार के ऊपर कई बेसिन व झीलों का विस्तार है।
  • इस पठार पर विश्व की सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित नाव चलाने योग्य झील टिटिकाका स्थित है इस झील की लंबाई 264 किमी. तथा चौड़ाई 96 किमी. है।
  • इस पठार पर विश्व की सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित राजधानी बोलीविया देश की राजधानी ‘लापाज’ है। इस पठार से टिन व टंगस्टन खनिज का खनन किया जाता है।

पैटागोनिया का पठार

  • यह पठार अर्जेंटीना देश में स्थित है। यह पठार गिरिपद पठार का सर्वोत्तम उदाहरण है।
  • यह पठार एण्डीज पर्वत के गिरिपद में स्थित है। यह पठारी भाग वृष्टि छाया प्रदेश में स्थित होने के कारण मरुस्थल के रूप में बढ़ रहा है।
  • अतः इस पठारी क्षेत्र में पैटागोनिया का मरुस्थल स्थित है।

गुयाना का पठार

 

  • यह पठार वेनेजुएला देश में स्थित है जो वस्तुतः शील्ड का उदाहरण है।
  • इस पठारी क्षेत्र की प्रमुख नदी, ओरिनीको नदी है। इस पठारी क्षेत्र में कैरो नदी पर विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात साल्टो एंजिल जलप्रपात स्थित है।
  • यह पठार जलविद्युत उत्पादन के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इस पठारी क्षेत्र से सोना व हीरे का खनन किया जाता है।

ब्राजील का पठा

  • यह पठार ब्राजील देश के पूर्वी भाग में स्थित है।
  • यह पठार लौह अयस्क के भण्डारों से समृद्ध है। पराना नदी का उद्गम इसी पठार का भाग माना जाता है।
  • इस पठारी क्षेत्र में कॉफी का भी उत्पादन किया जाता है।

माटो ग्रोसो (MATO GROSSO)

  • ब्राजील के दक्षिण-पश्चिमी भाग में बोलीविया की सीमा के पास स्थित एक पठार जहाँ से अमेजन की सहायक तापाजोस नदी उत्तरी दिशा में बहती है तथा पराग्वे नदी यहीं से निकलकर दक्षिणी दिशा में बहती है।
  • माटो ग्रासो में लौह अयस्क, मैंगनीज, टिन और चूना पत्थर के महत्त्वपूर्ण भंडार हैं।

बोबोरेमा पठार (BORBOREMA PLATEAU)

ब्राज़ील के उत्तर – पूर्व भाग में अवस्थित पठार जो ब्राजीलियन उच्च भूमि का भाग है।

यूरोप

बवेरियन उच्च भूमि/पठार

  • यह पठार जर्मनी देश के दक्षिणी भाग में स्थित है। इस पठारी क्षेत्र में जर्मनी का प्रमुख नगर म्यूनिख स्थित है।
  • इस पठारी क्षेत्र में ब्लैक फॉरेस्ट पर्वत से डेन्यूब नदी का उद्गम होता है।
  • यह पठार डेन्यूब नदी व कॉन्सटेन्स झील के मध्य में स्थित है।

मेसेटा का पठार

  • यह पठार स्पेन व पुर्तगाल देशों के मध्य में स्थित है। इसे आइबेरियन पठार भी कहा जाता है।
  • स्पेन की राजधानी मेड्रिड इसी पठार के मध्यवर्ती भाग में स्थित है।

मैसिफ का पठार

  • यह पठार फ्रांस देश में स्थित है। यह पठार अंगूर की खेती हेतु प्रसिद्ध है।
  • इस पठारी क्षेत्र से सेन व लोयर नदियों का उद्गम होता है। यह एक ज्वालामुखी लावा से निर्मित पठार है।

स्कैंडिनेवियन पठार

  • यह पठार नॉर्वे, स्वीडन व डेनमार्क देशों में फैला है।
  • इस पठारी क्षेत्र में ग्रेनाइट, नीस व चूना पत्थर की चट्टानें पाई जाती है।
  • इस पठारी क्षेत्र में अनेक हिमनद / ग्लेशियर पाए जाते हैं।
  • यह पठारी क्षेत्र अपने फियोर्ड (जलमग्न हिमानी) तटों के लिए प्रसिद्ध है।

बोहेमिया का पठार (BOHEMIAN PLATEAU)

  • यूरोप के मोरावियन हाइट्स व ब्लैक फॉरेस्ट के मध्यवर्ती पठारी क्षेत्र को बोहेमिया का पठार कहते हैं। यहीं बोहेमिया फॉरेस्ट स्थित है।
  • यहाँ कोयला प्रचुर मात्रा में मिलता है।
  • एल्ब नदी यहीं से निकलती है।

ऑस्ट्रेलिया

अर्नहेम पठार

  • यह ऑस्ट्रेलिया के अन्तरी क्षेत्र में स्थित एक पठार है। बलुआ पत्थर का बना यह पठार अपनी विविध पक्षी जातियों के लिए महत्त्व रखता है।
  • इसका अधिकतर भाग पथरीला या घास से ढँका हुआ है हालाँकि यह पठार जगह-जगह पर जंगल से युक्त भी है।

बर्कली पठार (BARKLY PLATEAU)

  • यह पठार ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी प्रांत में न्यूकैसल से क्वींसलैण्ड तक विस्तृत है।
  • यह यूरेनियम, ताँबा जैसे खनिज संसाधनों के लिए प्रसिद्ध है।

किम्बरले पठार (KIMBERLEY PLATEAU)

यह पठार ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी पश्चिमी भाग में विस्तृत है। यह पठार हीरा, लोहा, ताँबा व चाँदी के खनन हेतु प्रसिद्ध है।

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