🟢 RPSC द्वितीय श्रेणी शिक्षक संस्कृत पाठ्यक्रम 2026
(Senior Teacher Sanskrit Syllabus – Paper II)
राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर
माध्यमिक शिक्षा विभाग
विषय – संस्कृत
Paper – II
🔵 rpsc 2nd grade sanskrit syllabus 2026
🟠 प्रथम भाग : माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर
🔹 1. लघुसिद्धान्तकौमुदी (संज्ञा प्रकरण)
- माहेश्वर सूत्राणि
- इत्, लोपः
- प्रत्याहार संज्ञा
- स्वरभेदाः
- सवर्णम्
- उच्चारण स्थानानि
- संहिता
- संयोगः
- पदम्
🔹 2. सन्धि एवं सन्धि-विच्छेद
पाणिनीय सूत्रों के अनुसार
◾ अच् सन्धि
- इको यणचि
- एचोऽयवायावः
- आद्गुणः
- उरण् रपरः
- वृद्धिरेचि
- एति पररूपम्
- अकः सवर्णे दीर्घः
- एङः पदान्तादति
- ईदुदेद् द्विवचनं प्रगृह्यम्
◾ हल् सन्धि
- स्तोः श्चुना श्चुः
- ष्टुना ष्टुः
- झलां जशोऽन्ते
- यरोऽनुनासिकेऽनुनासिको वा
- तोर्लि
- झयो होऽन्यतरस्याम्
- शश्छोऽटि
- मोऽनुस्वारः
- अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः
◾ विसर्ग सन्धि
- विसर्जनीयस्य सः
- खरवसानयोर्विसर्जनीयः
- ससजुषो रुः
- अतो रोरप्लुतादप्लुते
- हशि च
- रो रि
- ढ्रलोपे पूर्वस्य दीर्घोऽणः
🔹 3. समास
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- द्विगु
- द्वन्द्व
- बहुव्रीहि
🔹 4. प्रत्यय
- तव्यत्, अनीयर्, यत्, ण्यत्
- क्यप्, ण्वुल्, तृच्, णिनि
- क्त, क्तवतु, शतृ, शानच्
- तुमुन्, क्त्वा, ल्यप्, ल्युट्
- घञ्, वक्तृन्, मतुप्, वतुप्
- त्व, तल्, ष्यञ्, तरप्, तमप्
- इतच्, तमसप्, ङाप्, ङीप्, ङीष्
🔹 5. शब्द रूप
- राम, हरि, पति, गुरु, पितृ, गच्छत्, राजन्
- रमा, मति, नदी, धेनु, भू, मातृ, सरित्, वाच्
- फल, वारि, मधु, मनस्, नामन्
- अस्मद्, युष्मद्
- तत्, इदम्, सर्व (त्रिषु लिङ्गेषु)
🔹 6. धातु रूप (पञ्चलकार)
लट्, लृट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ्
- परस्मैपदी – भू, नम्, गम्, पच्, नी, दृश्, स्था, पा, प्रच्छ्, लिख्, अस्, हन्, दा, नृत्, कृध्, शक्, क्री, ज्ञा, चुर्
- आत्मनेपदी – लभ्, सेव्
- उभयपदी – कृ, याच्
🔹 7. अव्यय
अत्र, तत्र, अद्य, ह्यः, श्वः, इत्थम्, इदानीम्, शनैः, उच्चैः, नीचैः, अपि, कथम्, पुनः, यथा, तथा, किम्, प्रातः, सायम्, चिरम्, किमर्थम्, कुतः, कदा, च
🔹 8. उपसर्ग
प्र, परा, अप, सम्, अनु, दुर्, दुस्, वि, आङ्, अति, सु, प्रति, परि, उप, निर्, निस्, अभि
🔹 9. अशुद्धि संशोधन एवं अनुवाद
- कारक-विभक्ति आधारित अशुद्धि संशोधन
- हिन्दी से संस्कृत अनुवाद
🔹 10. अन्य विषय
- वाच्य परिवर्तन (लट् लकार)
- लिङ्गानुसार संख्या ज्ञान (1–100)
- पूर्ण प्रत्ययान्त संख्याओं का प्रयोग
🔹 11. संस्कृत व्यवहारिक शब्दावली
- पशु, पक्षी, फल, शाक नाम
- पारिवारिक सम्बन्ध सूचक शब्द
🟠 द्वितीय भाग : स्नातक स्तर
🔹 पाणिनीय सूत्रों का प्रयोग (कारक, विभक्ति)
- प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी, सप्तमी
- कारक, अपादान, संप्रदान, अधिकरण आदि
🔹 छन्द
आर्या, अनुष्टुप्, इन्द्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, उपजाति, वंशस्थ, द्रुतविलम्बित, भुजङ्गप्रयात, वसन्ततिलका, मालिनी, मन्दाक्रान्ता, शिखरिणी, हरिणी, शार्दूलविक्रीडित, स्रग्धरा, पुष्पिताग्रा
🔹 अलंकार
अनुप्रास, यमक, श्लेष, स्वभावोक्ति, उपमा, अनन्वय, रूपक, उत्प्रेक्षा, व्यतिरेक, सन्देह, भ्रान्तिमान, निदर्शन, दृष्टान्त, अर्थान्तरन्यास, दीपक, तुल्ययोगिता, समासोक्ति, विभावना, विशेषोक्ति
🔹 वैदिक साहित्य
- वेद, उपवेद
- ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद्
🔹 निर्धारित ग्रंथ
- ऋग्वेद – अग्नि सूक्त, वरुण सूक्त, इन्द्र सूक्त, पुरुष सूक्त, प्रजापति सूक्त, संज्ञान सूक्त
- श्रीमद्भगवद्गीता – द्वितीय अध्याय
- ईशोपनिषद्
- अभिज्ञानशाकुन्तलम्
- शुकनासोपदेशः
🔹 भारतीय संस्कृति
- वर्ण व्यवस्था
- आश्रम व्यवस्था
- षोडश संस्कार
- पंचमहायज्ञ
- त्रिविध ऋण
- भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ
🔹 प्रमुख संस्कृत कवि
- महाकाव्य – वाल्मीकि, वेदव्यास, अश्वघोष, कालिदास, भारवि, माघ, श्रीहर्ष
- गद्य – दण्डी, सुबन्धु, बाणभट्ट, अम्बिकादत्त व्यास
- नाटक – भास, कालिदास, भवभूति, शूद्रक, विशाखदत्त
- नीति – भर्तृहरि, विष्णु शर्मा, नारायण पण्डित
- आधुनिक – भट्टमथुरानाथ शास्त्री, देवर्षि कलानाथ शास्त्री, डॉ. प्रभाकर शास्त्री आदि
🟠 तृतीय भाग : शिक्षण विधि (Teaching Methods)
🔹 भाषा कौशल विकास
- पठन
- लेखन
- वाचन
- श्रवण
🔹 शिक्षण विधियाँ
- व्याकरण शिक्षण
- गद्य शिक्षण
- पद्य शिक्षण
- नाटक शिक्षण
- अनुवाद शिक्षण
- रचना शिक्षण
🔹 पाठ योजना
- गद्य पाठ योजना
- पद्य पाठ योजना
- व्याकरण पाठ योजना
- अनुवाद पाठ योजना
- नाट्य पाठ योजना
- रचना पाठ योजना
🟢 परीक्षा योजना (Senior Teacher Sanskrit – Paper II)
- प्रश्न पत्र अधिकतम 300 अंकों का होगा।
- परीक्षा अवधि 2 घंटे 30 मिनट।
- कुल 150 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)।
- नकारात्मक अंकन लागू – प्रत्येक गलत उत्तर पर 1/3 अंक कटौती।
- प्रश्न पत्र में शामिल होगा –
- माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर का ज्ञान
- स्नातक स्तर का ज्ञान
- संबंधित विषय की शिक्षण विधियाँ
