समानार्थी शब्दों का विवेक
| शब्द | अर्थ/विवेचन |
|---|---|
| अज्ञ | जिसको ज्ञान न हो। |
| अज्ञानी | जिसको अनुभव न हो। |
| मूर्ख | जिसको ज्ञान देने पर भी ज्ञान प्राप्त न हो। |
| अज्ञात | जिसको ज्ञान न हो किन्तु जिसे जाना जा सकता हो। |
| अज्ञेय | जिसे जाना ही न जा सके, जैसे- ब्रह्म। |
| अनुकंपा | किसी के दुःख से दुःखी होकर उस पर की जानेवाली कृपा। |
| अनुग्रह | अपने से छोटों पर प्रसन्न होकर उनकी कुछ भलाई करना। |
| अनुभव | कर्मेन्द्रियों द्वारा प्राप्त होने वाला ज्ञान। |
| अनुभूति | ज्ञानेंद्रियों द्वारा तात्कालिक प्राप्त होने वाला आंतरिक ज्ञान। |
| अदभुत | अनोखा और समझ से बाहर। |
| अनबन | दो व्यक्तियों की आपस में न बनना। |
| खटपट | दो पक्षों के बीच झगड़ा। |
| अर्पण | अपनों से बड़ों के लिए। |
| प्रदान | बड़ों की ओर से छोटों के लिए। |
| अनुच्छेद | गद्यांश या अवतरण। |
| परिच्छेद | अध्याय। |
| अधर | केवल नीचे का होंठ। |
| ओष्ठ | ऊपर और नीचे के होंठ। |
| आलोचना | किसी एक पक्ष का विवेचन। |
| अध्ययन | सामान्य पठन-पाठन। |
| अनुशीलन | चिन्तन-मनन सहित अध्ययन। |
| अणु | परमाणुओं के विशिष्ट योग से बनने वाला पदार्थ का अंश। |
| परमाणु | किसी तत्व के अणु का एक कण, लघुत्तम अविभाज्य भाग। |
| निसार | जिसमें पहले कभी सार था और अभी नहीं है। |
| अशक्त | जिसमें कभी शक्ति रही ही नहीं हो। |
| निःशक्त | जिसमें कभी शक्ति रही हो और अब चुक गई हो। |
समानार्थी शब्दों का विवेक
| शब्द | अर्थ/विवरण |
|---|---|
| अधर्म | धर्म के विरुद्ध कार्य। |
| अन्याय | निष्पक्ष कार्य। |
| अपराध | सामाजिक/राजकीय नियमों का उल्लंघन। |
| पाप | नैतिकता का उल्लंघन। |
| अभिमान | अपने-आपकी प्रतिष्ठा अधिक व दूसरों की प्रतिष्ठा कम समझना। |
| अहंकार | अपने आप को झूठे ही बहुत अधिक समझना। |
| दर्प, घमंड | हर स्थिति में अपने आपको बड़ा व दूसरों को हीन समझना। |
| गौरव | अपने उचित कार्य या गुण पर समुचित श्रेष्ठता का भाव। |
| गर्व | रूप, यौवन, धन, विद्या आदि के कारण अपने को दूसरों से बढ़कर समझने का भाव। |
| अनुमोदन | किसी कार्यवाही या कथन पर सहमति देना। |
| समर्थन | किसी के प्रस्ताव, विचार पर सहमति देना। |
| स्वीकृति | किसी वस्तु, प्रार्थना को उच्च अधिकारी द्वारा मंजूर किया जाना। |
| संस्तुति | किसी के आवेदन, प्रार्थना को प्रदान की जाने वाली सहमति। |
| अग्र्रेषण | किसी के आवेदन, प्रार्थना को उच्च अधिकारियों के पास विचारार्थ भेज देना। |
| पुष्टि | पूर्व में दिए गए मौखिक आदेश को बाद में लिखित रूप में प्रमाणित करना। |
| अध्यक्ष | किसी संस्था का प्रधान (President)। |
| सभापति | किसी बैठक अथवा सभा का प्रधान। |
| अधिवेशन | किसी संस्था का बड़ा सम्मेलन। |
| बैठक | किसी संस्था की समिति की थोड़े समय के लिए सभा। |
| आमंत्रण | किसी समारोह में सम्मिलित होने के लिए सामान्य बुलावा। |
| निमंत्रण | भोजनादि के लिए विशेष बुलावा। |
| आपत्ति | अचानक आया संकट, जिसके निवारण का प्रबन्ध किया जा सकता है। |
| विपत्ति | बड़ी आपत्ति, प्राकृतिक आपदा, जिससे बचने का सहज उपाय न हो। |
| आधि | मस्तिष्क संबंधी बीमारी। |
| व्याधि | शारीरिक बीमारी। |
| अनिवार्य | जिसका निवारण न किया जा सके, जिसके होने की बाध्यता हो। |
| आवश्यक | जरूरी। |
| अनुरोध | किसी कार्य को करने का प्रार्थना युक्त आग्रह। |
| प्रार्थना | अपने से बड़ों से किसी कार्य को करने का निवेदन। |
| आग्रह | कार्य करवाने के लिए अधिकार भाव से, थोड़ी जिद के साथ निवेदन करना। |
| अस्त्र | फेंककर चलाए जाने वाले हथियार, जैसे- तीर, बड़ी गोला। |
| शस्त्र | हाथ में रखकर चलाए जाने वाले हथियार, जैसे- तलवार। |
| आयुध | सभी प्रकार के हथियार। |
समानार्थी शब्दों का विवेक (भाग 3)
| शब्द | अर्थ/विवरण |
|---|---|
| • अवस्था | जीवन, शरीर अथवा पदार्थ की कोई स्थिति। |
| आयु | जीवन की पूरी अवधि। |
| • अनुराग | किसी विषय/वस्तुओं के प्रति लगाव। |
| स्नेह | बड़ों का छोटों के प्रति प्रेम। |
| आसक्ति | किसी के प्रति विशेष मोह। |
| प्रणय | स्त्री और पुरुष के बीच का प्रेम। |
| प्रेम | छोटे बड़े सबके प्रति लगाव। |
| वात्सल्य | बड़ों का, विशेष रूप से माता-पिता का छोटे बच्चे के प्रति प्रेम। |
| • अद्वितीय | जिसके समान दूसरा कोई न हो। |
| अनुपम | जिसकी उपमा (किसी अन्य से तुलना) न दी जा सके। |
| • अर्चना | फूल, दीप आदि से देवता की पूजा। |
| आराधना | मनोकांक्षा की पूर्ति हेतु अपने आराध्य की पूजा। |
| पूजा | वस्तुओं के बिना, भाव के साथ ईश्वर की प्रार्थना। |
| उपासना | इष्ट देव के सामने। |
| आरती | दीपक, अगरबत्ती, धूपबत्ती के साथ पूजा करना। |
| • अभिनंदन | एक समारोह में किसी उपलब्धि पर औपचारिक रूप से सम्मान करना। |
| स्वागत् | किसी आए हुए व्यक्ति का सम्मान। |
| • अधिक | आवश्यकता से ज़्यादा। |
| काफी | निर्धारित सीमा के अनुरूप। |
| पर्याप्त | आवश्यकता के अनुसार चाहिए उतना। |
| • अमूल्य | जिसका कोई मूल्य न आँका जा सके। |
| बहुमूल्य | जिसका मूल्य बहुत हो। |
| • अभिलाषा | किसी वस्तु को प्राप्त करने की हार्दिक इच्छा। |
| इच्छा | किसी वस्तु को प्राप्त करने की साधारण चाह। |
| आकांक्षा | प्रतीक्षानुसार इच्छा। |
| आवश्यकता | पूरी हो सकने योग्य इच्छा। |
| कामना | सच्चे भाव की इच्छा। |
| संकल्प | किसी कार्य को करने का दृढ़ निश्चय। |
| • अपमान | किसी की प्रतिष्ठा को सायास ठेस पहुँचाना। |
| अवमानना | अनायास किसी की प्रतिष्ठा की हानि। |
| तिरस्कार | किसी वस्तु या व्यक्ति के सम्मान की उपेक्षा करना। |
| • अड़चन | अचानक आई बाधा। |
| अवरोध | जानबूझकर खड़ी की गई बाधा। |
| आज्ञा | इजाजत भी, आदेश भी। |
| आदेश | किसी कार्य को आवश्यक रूप से करने का हुक्म। |
| • अनुमति | इजाजत। |
| निर्देश | मार्गदर्शनपरक आदेश। |
| • आचार | व्यक्ति के चरित्र एवं चाल-चलन संबंधी आचरण। |
| व्यवहार | दूसरों के साथ किया जाने वाला आचरण। |
समानार्थी शब्दों का विवेक (भाग 4)
| शब्द | अर्थ/विवरण |
|---|---|
| • अनुमान | बौद्धिक तर्क द्वारा लिया गया निर्णय। |
| प्राक्कलन | भविष्य में होने वाले व्यय के बारे में गणना के सहारे किया गया अनुमान। |
| • अपयश | यश के बाद होने वाली बुराई। |
| कलंक | समाज-विरोधी आचरण करने पर लांछन। |
| • आलोचना | दोषों का सम्यक् विवेचन। |
| निंदा | किसी के कार्यों की बुराई करना। |
| • आशा | किसी अच्छे कार्य के होने की या किसी अच्छे कार्य के न होने की उम्मीद। |
| अन्वेषण | पहले से ही विद्यमान किसी वस्तु की खोज। |
| अनुसंधान | छानबीन कर किन्हीं गुप्त नवीन रहस्यों का पता लगाना। |
| गवेषणा | किसी गूढ़ विषय की मूल स्थिति जानने के लिए गंभीर अध्ययन करना। |
| • आविष्कार | एक नई अपूर्व वस्तु या सिद्धांत का निर्माण। |
| आकार | किसी वस्तु का उसकी लंबाई-चौड़ाई-ऊँचाई से संबंधित रूप। |
| रूप | किसी वस्तु की संपूर्ण आकृति जिसमें रंग आदि भी सम्मिलित होता है। |
| • आनंद | शरीरार्थ और आत्मिक सुख। |
| आह्लाद | अस्थायी आवेशयुक्त प्रसन्नता। |
| हर्ष | मानसिक, क्षणिक, आनंद से कम। |
| उल्लास | उत्साहयुक्त क्षणिक प्रसन्नता। |
| • आदरणीय | बड़ों के लिए आदर-सूचक शब्द या वह व्यक्ति जिसे हम आदर करने योग्य समझते हैं। |
| पूज्य, पूजनीय | जिनके प्रति अत्यधिक आदर भाव हो, ईश्वर, माता-पिता, दादा-दादी, गुरु। |
| माननीय, सम्माननीय | बड़ों के प्रति सामान्य आदरसूचक शब्द। |
| • आदि | प्रायः एक या दो उदाहरणों के बाद आदि का प्रयोग किया जाता है। |
| इत्यादि | अधिक उदाहरणों के बाद इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। |
| • आतंक | किसी दुष्ट बलशाली द्वारा फैलाया गया भय। |
| त्रास | किसी भय से उत्पन्न हुई बेचैनी। |
| डर, भय | किसी भी अनिष्ट की आशंका से उत्पन्न दुःखपूर्ण भाव, भले ही उसका कारण कोई अन्य हो या वह स्वयं। |
| • उदास | वांछित कार्य न होने पर अन्यमनस्क हो जाना, मन न लगना। |
| उदासीन | विषयों एवं वस्तुओं से तटस्थता अर्थात् कोई लगाव न होना। |
| तटस्थ | किसी भी पक्ष की ओर न होना और विवाद से दूर, निष्पक्षीय रहना। |
📢 Stay Updated with Latest Rajasthan Govt Exams
Join our Telegram & WhatsApp groups for instant alerts, notes & test papers!
