नदियाँ

  • किसी भी प्रदेश की अपवाह प्रणाली (Drainage System) पर उस प्रदेश विशेष की ढाल एवं भू-वैज्ञानिक संरचना का प्रभाव पड़ता है।

नदियों के प्रकार –

अनुगामी या अनुवर्ती अपवाह प्रणाली (Consequent Drainage System)

  • ढाल के अनुरूप गमन करने वाली नदी को अनुगामी नदी या अनुवर्ती नदी कहा जाता है।
  • प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ अनुवर्ती हैं। अनुवर्ती नदियों को नमन जलधारा (Dip Streams) भी कहा जाता है, क्योंकि ये नदियाँ नमन या नति (Dip) करती हुई बहती हैं। अनुवर्ती नदियों के विकास के पश्चात् उनकी प्रथम सहायक नदियों का विकास होता है।
  • ये सहायक नदियाँ अनुवर्ती नंदी से लगभग समकोण पर मिलती हैं एवं इन्हें परवर्ती नदी (Subsequent Stream) कहा जाता है।
  • परवर्ती नदियों को स्ट्राइक जलधारा (Strike Stream) भी कहा जाता है, क्योंकि ये जलधाराएँ नति लंब या अनुदैर्ध्य दिशा में बहती हैं।
  • परवर्ती या उप-अनुगामी नदी घाटियों के विकसित होने पर उनके दोनों ओर से सरिताएँ आकर उनमें मिलने लगती हैं। ये सभी जलधाराएँ समकोण पर मिलती हैं एवं मुख्य नदी (अनुगामी नदी) की दिशा में भी हो सकती हैं और उसके बिल्कुल विपरीत दिशा में भी।
  • इन्हें क्रमशः नवानुवर्ती नदियाँ (Resequent Streams) एवं प्रत्यानुवर्ती नदियाँ (Obsequent Stream) कहा जाता है।
  • 1. प्रधान अनुवर्ती नदी,
  • 2. परवर्ती नदी,
  • 3. नवानुवर्ती नदी या उप-अनुवर्ती नदी,
  • 4. प्रत्यानुवर्ती नदी।

अननुवर्ती अपवाह प्रणाली (Inconsequent Drainage System)

  • कई नदियाँ ऐसी भी हैं, जो भूमि की ढाल के अनुरूप गमन नहीं करती हैं। उनकी अपवाह प्रणाली एवं भू-गर्भिक संरचना के बीच कोई संबंध नहीं होता है।
  • ऐसी नदियाँ अननुवर्ती नदियाँ (Insequent or Inconsequent) कहलाती हैं। इन नदियों का विकास दो प्रकार से होता है:

अध्यारोपित अपवाह प्रणाली (Superimposed Drainage Pattern)

  • यदि किसी प्रदेश में ऊपर स्थित चट्टानों की संरचना उसके नीचे स्थित चट्टानों की संरचना से भिन्न हो, तो इस प्रकार की अपवाह प्रणाली का विकास होता है। ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम नदी की घाटी का निर्माण ऊपरी आवरण पर होता है।
  • इसके पश्चात् नदी निम्न कटाव द्वारा ऊपर स्थित घाटी का विस्तार निचली संरचना पर भी करती है हालाँकि नीचे स्थित चट्टानों की संरचना ऊपर के चट्टानों की संरचना से भिन्न है।
  • यदि यह नीचे की संरचना ऊपर होती, तो नदी की घाटी का रूप इससे अलग हो सकता था।
  • ऐसी नदी को अध्यारोपित नदी कहा जाता है क्योंकि इसकी अपवाह प्रणाली नीचे की पुरानी चट्टानों पर अध्यारोपित हो गई है।
  • अमेरिका की कनेक्टीकट एवं हडसन नदी तथा भारत की सोन, चम्बल, स्वर्णरखा एवं बनास नदियाँ अध्यारोपित नदियों का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

पूर्वगामी या पूर्ववर्ती अपवाह प्रणाली (Antecedent Drain age System)

  • पूर्ववर्ती अपवाह प्रणाली का तात्पर्य ऐसी अपवाह प्रणाली से है, जिस पर संरचना या स्थलखंड के उत्थान का प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • यदि कोई नदी अपनी घाटी का विकास कर चुकी हो एवं उसके पश्चात् नदी के मार्ग में उत्थान होता है एवं नदी ऊँचे उठे हुए स्थलखंड को काटकर अपने पुराने मार्ग पर कायम रहती है तो ऐसी अपवाह प्रणाली को पूर्वगामी अपवाह प्रणाली कहा जाता है।
  • पूर्वगामी अपवाह प्रणाली के उदाहरण सभी पर्वतीय क्षेत्रों में देखने को मिलते हैं। भारत में सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र आदि नदियाँ पूर्ववर्ती अपवाह प्रणाली के उदाहरण हैं।
  • इस प्रकार अध्यारोपित एवं पूर्ववर्ती अपवाह प्रणाली में मुख्य अंतर यह है कि अध्यारोपित नदी ऊपरी संरचना में निर्मित घाटी का आरोपण निचली संरचना में करती है, जबकि पूर्ववर्ती नदी में संरचना का महत्त्व नहीं होता है, बल्कि नदी के मार्ग में उत्थान होता है एवं नदी उत्थान के समय गहरा कटाव करके अपने पूर्व मार्ग का अनुसरण करती है।

अपवाह प्रतिरूप –

वृक्षाकार प्रतिरूप (Dendritic Pattern)

  • इस अपवाह प्रतिरूप में मुख्य नदी वृक्ष के तने के समान होती है एवं उसकी सहायक नदियाँ वृक्ष की शाखाओं एवं प्रशाखाओं के समान। हालाँकि वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप पर संरचना का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है तथापि इसका आदर्श विकास उन्हीं क्षेत्रों में होता है, जहाँ चट्टानों की संरचना एक समान होती है।
  • ग्रेनाइट चट्टानों वाले क्षेत्रों में इसका सर्वाधिक विकास होता है। छोटा नागपुर पठार की नदियों एवं दक्षिण भारत की नदियों (गोदावरी, कृष्णा आदि) में यह प्रतिरूप पाया जाता है।

समानांतर प्रतिरूप (Parallel Pattern)

  • इस अपवाह प्रतिरूप का विकास तीव्र ढाल वाले क्षेत्रों में होता है, जहाँ मुख्य एवं सहायक धाराएँ आपस में मिलने के पूर्व काफी दूरी तक एक-दूसरे के समानांतर बहती हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पूर्वी तटीय मैदान एवं गंगा के ऊपरी मैदान की नदियों में यह प्रतिरूप पाया जाता है।

जालीनुमा प्रतिरूप (Trellise Pattern)

  • यह प्रतिरूप उन क्षेत्रों में पाया जाता है, जहाँ कड़ी एवं मुलायम चट्टानें साथ-साथ किसी दिशा में झुकी हुई मिलती हैं। साथ ही, क्वेस्टा स्थलाकृति (Cuesta Topography) वाले प्रदेशों में भी यह प्रतिरूप पाया जाता है।
  • इस अपवाह प्रतिरूप में मुख्य नदियाँ उनकी सहायक एवं उप-सहायक नदियाँ आपस में समकोण पर मिलती हैं एवं जालीनुमा प्रतिरूप उपस्थित करती हैं।

आयताकार प्रतिरूप (Rectangular Pattern)

  • इसका विकास सामान्यतः उन क्षेत्रों में होता है, जहाँ पर चट्टानों की संधियाँ आयत के रूप में होती हैं।
  • बिहार के पलामू जिले में यह प्रतिरूप पाया जाता है।
  • कोसी एवं सतलुज नदियों के अपवाह क्षेत्र में भी यह प्रतिरूप पाया जाता है।

अपकेन्द्रीय या अरीय प्रतिरूप (Centrifugal or Radial Pattern)

  • यह अपवाह प्रतिरूप गुम्बदाकार पर्वत एवं ज्वालामुखी शंकुओं के क्षेत्रों में पाया जाता है, जहाँ शीर्ष भाग से नदियाँ निकलकर चारों दिशाओं में प्रवाहित होती हैं।
  • भारत में पारसनाथ की पहाड़ी, अमरकंटक पर्वत एवं छोटा नागपुर की पहाड़ियों पर यह प्रतिरूप पाया जाता है।
  • यह प्रतिरूप श्रीलंका में भी पाया जाता है।

केन्द्रोन्मुखी या अभिकेन्द्री प्रतिरूप

(Centripetal Pattern)

  • यह प्रतिरूप अपकेन्द्रीय प्रतिरूप के बिल्कुल विपरीत होता है एवं अन्तःस्थलीय अपवाह (Inland drainage) के क्षेत्र में पाया जाता है।
  • इस अपवाह प्रतिरूप में नदियाँ चारों ओर की ऊँची भूमि से बहती हुई मध्य की नीची भूमि, झील या आंतरिक सागर में पहुँचती हैं।
  • फ्रांस के पेरिस बेसिन, नेपाल की काठमाण्डू घाटी, तिब्बत एवं लद्दाख के उच्च पठारी भागों में यह प्रतिरूप पाया जाता है।

वृत्ताकार या वलयाकार प्रतिरूप (Annular Pattern)

  • इस प्रकार के प्रतिरूप में नदियाँ पर्वतों की परिक्रमा करती हुई प्रवाहित होती हैं।
  • किऊल नदी मुंगेर में मणिहारी पहाड़ को घेरते हुए प्रवाहित होती है एवं वलयाकार प्रतिरूप का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

कंटकीय प्रतिरूप (Barbed Pattern)

  • जब मुख्य नदी के ऊपरी भाग में ऐसी सहायक जल धाराएँ मिलती हैं, जिनके प्रवाह की दिशा मुख्य नदी के विपरीत हुआ करती है, तो इन सहायक नदियों द्वारा निर्मित प्रतिरूप, कंटकीय प्रतिरूप कहलाता है।
  • यह प्रतिरूप सामान्यतः सरिता अपहरण वाले क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • सिंधु एवं ब्रह्मपुत्र नदियाँ अपने ऊपरी भाग में इस प्रतिरूप का निर्माण करती हैं।

एशिया

यांग्टीसीक्यांग नदी

  • इसका उद्गम चीन में तिब्बत के पठारी क्षेत्र में जरी की पहाड़ियों से होता है।
  • यह नदी पूर्व दिशा में बहने के बाद उत्तरी प्रशांत महासागर के भाग पूर्वी चीन सागर में जाकर गिर जाती है।
  • यह एशिया महाद्वीप की सबसे लंबी नदी है। इसकी लंबाई 6,300 किमी है। यह विश्व की तीसरी सबसे लंबी नदी है।
  • इस नदी के किनारे चीन देश का वुहान व शंघाई नगर स्थित है।

ह्वांग-हो/पीली नदी

  • इसका उद्गम चीन देश में ‘बायन हर पहाड़ियों’ से होता है।
  • यह नदी अपने साथ में लाल, पीली मिट्टी बहाकर लाती है पीला सागर में जाकर गिर जाती है।
  • ह्वांग-हो नदी चीन देश में अनेक बार बाढ़ लेकर आती है इसलिए ह्वांग-हो नदी को चीन का शोक (Sorrow of China) कहा जाता है।

मेकांग नदी

  • इसका उद्गम तिब्बत के पठारी क्षेत्र से होता है।
  • इस नदी का उद्गम चीन में होता है और बाद में यह म्यांमार, लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया व वियतनाम देशों में बहती है। अंततः यह नदी डेल्टा बनाने के बाद दक्षिणी चीन सागर में जाकर गिर जाती है।
  • मेकांग नदी के किनारे लाओस की राजधानी वियंतियाने एवं कंबोडिया की राजधानी नोमपेन्ह स्थित है। यह आसियान देशों की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है।

इरावदी नदी

  • इसका उद्गम म्यांमार में अराकान योमा पर्वत से होता है। यहाँ से म्यांमार के मांडले व रंगून नगरों से बहने के बाद में बंगाल की खाड़ी में जाकर गिर जाती है।
  • यह नदी म्यांमार देश को दो भागों में विभाजित करती है। चिंदविन इसकी प्रमुख सहायक नदी है।

आमूर नदी

  • इसका उद्गम मंचूरिया की पहाड़ियों से होता है।
  • आमूर नदी चीन व रूस के मध्य सीमा बनाने के पश्चात् उत्तरी प्रशांत महासागर के भाग जापान सागर में गिर जाती है।

आमू-दरिया नदी

इसका उद्गम पामीर पठार से होता है और यह नदी अफगानिस्तान व तजाकिस्तान की सीमा बनाती है।

टिगरिस नदी

  • इसका उद्गम टोरस पर्वत से होता है और फरात इसकी सहायक नदी है।
  • टर्की (वर्तमान तुर्कीये), सीरिया व ईराक में बहती हुई फारस की खाड़ी में गिरती है
  • यह बेसिन खजूर उत्पादन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
  • इस नदी के किनारे इराक का बसरा नगर (मोतियों के लिए प्रसिद्ध) स्थित है।

यूफेटस नदी

  • इसका उद्गम टर्की (वर्तमान तुर्कीय) में आर्मेनियाई उच्चभूमि से होता है। यहाँ से टर्की, सीरिया व ईराक देशों में बहने के बाद टिगरिस नदी में मिल जाती है।
  • टिगरिस व यूफ्रेटस के मध्य प्राचीन सभ्यता मेसोपोटामिया स्थित थी।

सिंधु नदी

  • इसका उद्गम तिब्बत क्षेत्र में कैलाश पर्वत श्रेणी में बोखर चू (Bokhar chu) के निकट एक हिमनद से होता है, जो 4,164 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
  • सिंधु नदी कराची (पाकिस्तान) के पूर्व में अरब सागर में जाकर गिरती है।
  • यह विश्व की सबसे बड़ी नदी द्रोणियों में से एक है। जिसका क्षेत्रफल 11 लाख, 65 हजार वर्ग किलोमीटर है। भारत में इसका क्षेत्रफल 3,21,289 वर्ग किमी. है।
  • इसकी कुल लंबाई 2,880 किमी. है और भारत में इसकी लंबाई 1,114 किलोमीटर है। भारत में यह हिमालय की नदियों में सबसे पश्चिमी नदी है।

ब्रह्मपुत्र नदी

  • विश्व की सबसे बड़ी नदियों में से एक ब्रह्मपुत्र का उद्गम कैलाश पर्वत में मानसरोवर झील के निकट चेमायुंगडुंग हिमनद में है।
  • इसकी सम्पूर्ण लंबाई 2,900 किमी. है। भारत में इसकी लंबाई 916 किमी. है।
  • इस नदी में बांग्लादेश में दायीं ओर से तीस्ता नदी इसमें मिलती है और इसके बाद ब्रह्मपुत्र नदी जमुना के नाम से जानी जाती है अंत में यह नदी पद्मा के साथ में मिलकर सुन्दरवन डेल्टा का निर्माण करते हुए बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है।

अफ्रीका

नील नदी

  • यह विश्व की सबसे लंबी नदी है इसकी लंबाई 6690 किमी. है। नील नदी दो नदियों के आपस में मिलने से बनती है।
  • 1. श्वेत नील नदी
  • 2. नीली नील नदी
  • श्वेत नील नदी का उद्गम विक्टोरिया झील से होता है और यह नदी युगाण्डा, दक्षिणी सूडान व उत्तरी सूडान में बहती है। उत्तरी सूडान की राजधानी खार्तुम में श्वेत नील नदी में नीली नदी मिल जाती है तब इसे नील नदी कहा जाता है।
  • नील नदी पर मिस्र देश में आस्वान बाँध, नासिर झील का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार नील नदी पर युगाण्डा देश में ओवन फॉल बाँध का भी निर्माण किया गया है।
  • नील नदी को मिस्र देश के वरदान के रूप में माना जाता है।
  • नील नदी अंततः डेल्टा बनाते हुए भूमध्य सागर में जाकर गिर जाती है

लिंपोपो नदी

  • दक्षिण अफ्रीका देश से मरीका नदी व क्रोकोडाईल नदी के आपस में मिलने से इस नदी का निर्माण होता है। दक्षिण अफ्रीका के ट्रांसवाल क्षेत्र से निकलकर हिंद महासागर में गिरती है।
  • यह नदी दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, मोजाम्बिक व जिम्बाब्वे देशों से बहते हुए मकर रेखा को दो बार काटती है।
  • लिंपोपो नदी विशाल मगरमच्छों व दरियाई घोड़ों के लिए प्रसिद्ध है।
  • लिंपापो नदी दक्षिणी अफीका व बोत्सवाना की सीमा तथा दक्षिणी अफीका व जिम्बाब्वे की सीमा बनाती है।

कांगो/जायरे नदी

  • इस नदी का उद्गम कांगो /जायरे देश के दक्षिण-पूर्वी भाग में कटंगा के पठार से होता है। इसमें किशनगनी नगर के निकट आकर लुआलाबा नदी व लोमामी नदी के रूप में होता है। यह दोनों नदियाँ मिलकर कांगो के रूप में प्रवाहित होती है।
  • कांगो/जायरे नदी विषुवतीय वर्षा वन क्षेत्र (पिग्मी जनजाति निवास स्थान) से प्रवाहित होने के बाद अटलांटिक महासागर में जाकर गिर जाती है।
  • यह नदी भूमध्य रेखा/विषुवत रेखा को दो बार काटती है। यह अफ्रीका महाद्वीप की दूसरी सबसे लंबी नदी है।
  • कांगो/जायरे नदी के उत्तर दिशा में उबांगी नदी व दक्षिण दिशा से कसाई नदी आकर मिलती है।
  • कांगो नदी के किनारे कांगो देश की राजधानी किंशासा तथा मटाड़ी बंदरगाह स्थित है।
  • कांगो नदी पर कांगो देश में स्टेनले जलप्रपात एवं लिविंगस्टोन जलप्रपात निर्मित है।
  • कांगो नदी पर कांगो देश में इंगा बाँध निर्मित है।

नाइजर नदी

  • इसका उद्गम अफ्रीका महाद्वीप में गिनी देश में गुयाना उच्चभूमि से होता है यहाँ से गिनी, माली, नाइजर, बेनिन व नाइजीरिया से होते हुए डेल्टा बनाकर गिनी की खाड़ी (उत्तरी अटलांटिक महासागर का भाग) में गिर जाती है।
  • नाइजर नदी को तेल ढोने वाली नदी के उपनाम से जाना जाता है। नाइजर नदी के किनारे माली देश की राजधानी बमेको व प्रसिद्ध नगर टिम्बक टू स्थित हैं।
  • नाइजर नदी पर नाइजर देश की राजधानी न्यामी स्थित है।
  • नाइजर नदी पर नाइजीरिया देश में कैंजी बाँध का निर्माण किया गया है।
  • नाइजर नदी नाइजीरिया देश के पोर्ट हार्टकोर्ट नगर (बंदरगाह) के निकट डेल्टा बनाते हुए गिनी की खाड़ी में गिरती है।
  • नाइजीरिया देश को तेल व ताड़ का देश कहा जाता है।

ऑरेंज नदी

  • यह नदी दक्षिणी अफ्रीका के ड्रेकेंसबर्ग पर्वत से निकलकर लेसोथो, दक्षिण अफ्रीका तथा नामीबिया की सीमा के सहारे प्रवाहित होती हुई दक्षिणी अटलांटिक महासागर के अलेक्जेंडर की खाड़ी में गिरती है।
  • इस नदी पर दक्षिण अफ्रीका में ऑग्रेबीज़ जलप्रपात स्थित है।

ओकावांगो नदी

इसे कुबांगो नदी भी कहा जाता है। यह अंगोला से निकलकर कालाहारी मरुस्थल के उत्तरी बोत्सवाना में स्थित एक शुष्क बेसिन में गिरकर सूख जाती है।

जाम्बेजी नदी

  • अंगोला व जांबिया देशों की सीमा से उद्गम होने के बाद जाम्बिया तथा जिम्बाब्वे की सीमा बनाती हुई मोजाम्बिक देश से होकर मोजाम्बिक की खाड़ी (हिन्द महासागर) में गिर जाती है।
  • करीबा बाँध व विक्टोरिया जलप्रपात इसी नदी पर स्थित है।

उत्तरी अमेरिका

मिसीसिपी नदी

इस नदी का उद्गम मिन्नेसोटा राज्य में स्थित इटस्का झील से होता है।

यह उत्तरी अमेरिका की सबसे लंबी नदी है। यह नदी पक्षी के पंजे के आकार का डेल्टा (बर्ड फुट डेल्टा) बनाते हुए मैक्सिको की खाड़ी में गिर जाती है।

मिसौरी नदी

मिसौरी नदी का उद्गम यूएसए देश में रॉकी पर्वतीय क्षेत्र से होता है यह नदी पूर्व दिशा में बहती हुई सेंट लुईस नगर के निकट आकर मिसिसिपी नदी में मिल जाती है।

सेंट लॉरेंस नदी

  • इस नदी का उद्गम ह्यूरन झील से होता है। यह नदी महान झीलों (ग्रेट लेक्स) को आपस में जोड़ती है।
  • यह नदी यू.एस.ए. व कनाडा के मध्य उत्तरी सीमा बनाने के पश्चात् उत्तरी अटलांटिक महासागर में गिर जाती है।

कोलंबिया नदी

  • इसका उद्गम कनाडा ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में कोलंबिया झील से होता है यहाँ से कनाडा व यू.एस.ए. देश के वॉशिंगटन व ओरेगन प्रांतों में बहने के बाद यह नदी प्रशांत महासागर में जाकर गिर जाती है।

रियो ग्रांडे नदी

  • इस नदी का उद्गम रॉकीज पर्वत पर अल्बर्ट चोटी से होता है।
  • यू.एस.ए. व मैक्सिको के मध्य सीमा बनाने के पश्चात् यह नदी मैक्सिको की खाड़ी में गिर जाती है।

कोलोरेडो नदी

  • इसका उद्गम यू.एस.ए. के कालोरेडो प्रांत में ला-परोसे झील से होता है। यह नदी यू.एस.ए. व मैक्सिको में बहने के बाद प्रशांत महासागर के भाग कैलिफोर्निया की खाड़ी में जाकर गिर जाती है। कोलोरेडो नदी पर यू.एस.ए. में हूवर बाँध व बोल्डर बाँध का निर्माण किया गया है।
  • कोलोरेडो नदी रॉकीज पर्वत के मध्य से प्रवाहित होकर लंबवत व क्षैतिज अपरदन/कटाव की क्रिया से अंग्रेजी के अक्षर I के समान जिस आकृति का निर्माण करती है, उसे केनियन कहा जाता है इस नदी का केनियन सबसे गहरा एवं विशाल है, जिसे ग्रैंड केनियन के नाम से जाना जाता है।

यूकॉन नदी

  • इसका उद्गम अलास्का क्षेत्र की अलास्का श्रेणी से होता है यहाँ से कनाडा व अलास्का (USA) होते हुए प्रशांत महासागर के भाग बेरिंग सागर में जाकर गिर जाती है। यूकॉन नदी सोने के भंडारों हेतु प्रसिद्ध है।

मैकेन्जी नदी

  • कनाडा के उत्तरी – पश्चिमी प्रांत में स्थित ग्रेट स्लेव झील से निकलकर ब्यूफोर्ट सागर में गिरने वाली एक नदी जो मैकेन्जी पर्वत के समानान्तर प्रवाहित होती है।
  • यहाँ के उत्तर दिशा में बहने के बाद आर्कटिक महासागर के भाग ब्यूफोर्ट सागर में जाकर जाती है।
  • यह उत्तरी अमेरिका की दूसरी सबसे लम्बी नदी है। 1789 ई. में अलेक्जेण्डर मैकेन्जी ने इसकी खोज की थी।

हडसन नदी

संयुक्त राज्य अमेरिका की एक नदी जो चैम्पियन झील से निकल कर दक्षिण की ओर बहती हुई न्यूयॉर्क के पास अटलांटिक महासागर में गिरती है। हडसन मोहाक घाटी में औद्योगिक संकेन्द्रण है। इसी के तट पर न्यूयॉर्क शहर बसा है।

दक्षिणी अमेरिका

अमेजन नदी

  • यह विश्व की सर्वाधिक जल बहाव वाली नदी है।
  • यह विश्व की दूसरी सबसे लंबी नदी है।
  • यह नदी विषुवतीय वर्षा वन क्षेत्र सेल्वास से होकर प्रवाहित होती है।
  • अमेजन नदी एण्डीज पर्वतीय क्षेत्र से निकलने के पश्चात् पेरु, कोलंबिया, इक्वाडोर, ब्राजील देशों में से प्रवाहित होती हुई अटलांटिक महासागर में गिरती है।
  • अमेजन नदी के निकटवर्ती विषुवतीय वर्षा वन में विशाल आकार के जंतु या साँप एनाकोंडा पाए जाते हैं।
  • अमेजन नदी के निकटवर्ती विषुवतीय वर्षा वन को विश्व के फेफड़े के उपनाम से जाना जाता है।
  • अमेजन नदी की सहायक नदी ओरिनीको है। यह नदी वेनेजुएला की प्रमुख नदी है।

ओरिनिको नदी

  • इस नदी का उद्गम गुयाना पठार से होता है तथा यह अटलांटिक महासागर में गिरती है।
  • इसकी सहायक कैरोना नदी पर विश्व का सबसे ऊँचा प्रपात एंजिल जलप्रपात अवस्थित है।
  • ओरिनिको नदी को ‘झरनों का प्रदेश’ कहा जाता है।

मैग्डलेना

  • यह कोलंबिया की महत्त्वपूर्ण नदी है।
  • यह एंडीज पर्वत के कार्डिलेरा ऑक्सीडेंटल व कॉर्डिलेरा ओरिएंटल के मध्य निर्मित भ्रंश से होकर गुजरती है।
  • इसके मुहाने पर खनिज तेल का विशाल भंडार है।

जापुरा नदी

दक्षिणी अमेरिका में कोलम्बिया की पूर्वी श्रेणी कार्डिलेरा ओरिएन्टल से निकलकर पूर्व की ओर बहती हुई ब्राज़ील में अमेजन से मिलने वाली अमेजन की सहायक नदी है।

तापाजोस नदी

  • यह दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील के मांटोग्रासो पठार से निकलकर सान्तारेम नगर के पास अमेजन नदी में मिलती है।
  • इसके किनारों पर रबड़ के महत्त्वपूर्ण बाग मिलते हैं।

नीग्रो नदी

  • अमेजन नदी की वामवर्ती सहायक नदी जो कोलम्बिया से निकलकर ब्राज़ील के मानुष नगर के पास अमेजन से मिलती है।
  • इसे रियो नीग्रो नदी भी कहा जाता है।

पराना नदी

  • यह दक्षिण अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी नदी है।
  • इसे आल्टो पराना भी कहा जाता है। यह ब्राजील उच्च भूमि के दक्षिणी भाग से निकलकर ब्राजील पराग्वे तथा पराग्वे -अर्जेन्टीना सीमा पर बहती हुई रियो-डी-ला-प्लाटा की खाड़ी में गिरती है।
  • इसके किनारे पराना नगर अर्जेंटीना में स्थित है।
  • पराना नदी पर ब्राजील और पराग्वे की संयुक्त परियोजना के अंतर्गत इताईपु बाँध निर्मित किया गया है जो ब्राजील के इताईपु नामक स्थान पर स्थित है।

पराग्वे नदी

  • पराना की दक्षिणवर्ती सहायक नदी जो ब्राजील के दक्षिणी उच्च भाग मांटोग्रासो से निकलकर पराग्वे में प्रवाहित होती हुई पराग्वे अर्जेंटीना सीमा पर पराना नदी से मिलती है। यह कन्सेप्सन नगर तक नौगम्य है।
  • यह ब्राज़ील के रबड़ उत्पादक क्षेत्र से होकर प्रवाहित होती है।

उरुग्वे नदी

  • यह नदी ब्राजील के दक्षिणी भाग से निकलकर ब्राजील अर्जेंटीना तथा उरुग्वे – अर्जेंटीना की सीमा पर बहती हुई रियो डी ला प्लाटा की खाड़ी में गिर जाती है।
  • पराना, पराग्वे तथा उरुग्वे नदियों को सम्मिलित रूप से ला प्लाटा कहा जाता है।

साओ फ्रांसिस्को नदी

यह ब्राजील की एक नदी है जो बेलो होरीजोन्टे के दक्षिण ब्राजीलियन उच्च भूमि के मिनास गेरास से निकलकर उत्तर दिशा में बहती हुई पूर्व में मुड़कर मसीलो के पास दक्षिणी अटलांटिक महासागर में गिरती है।

यूरोप

डेन्यूब नदी

  • इसका उद्गम जर्मनी देश में ब्लैक फॉरेस्ट पर्वत से होता है। यहाँ से जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया, हंगरी, क्रोएशिया, सर्बिया, बुल्गारिया व रोमानिया देशों में बहने के बाद काला सागर में जाकर गिर जाती है।
  • यह यूरोप की दूसरी सबसे लम्बी नदी है। इस नदी का उपयोग नौवहन के लिए किया जाता है।

यह नदी विभिन्न देशों की राजधानियों से होकर गुजरती है जो इस प्रकार है

देश और राजधानियाँ
क्र.सं. देश राजधानियाँ
1 ऑस्ट्रिया वियना
2 स्लोवाकिया ब्रातिस्लावा
3 हंगरी बुडापेस्ट
4 सर्बिया बेलग्रेड
5 रोमानिया बुखारेस्ट

राइन नदी

  • इसका उद्गम स्विट्जरलैंड देश में आल्प्स पर्वत से होता है।
  • यहाँ से स्विट्जरलैंड, लिचस्टाइन, ऑस्ट्रिया, फ्रांस जर्मनी एवं हॉलैंड/नीदरलैण्ड देशों से बहने के बाद उत्तरी सागर में जाकर गिर जाती है। राईन नदी अपने मार्ग में भ्रंश घाटी का निर्माण करती है।
  • यह नदी फ्रांस तथा जर्मनी के सीमा क्षेत्र पर वॉसजीस तथा ब्लैक फोरेस्ट पर्वतों की बीच बहती है। राईन नदी विश्व की व्यस्ततम नदी है। इसकी प्रमुख सहायक नदी रूर है।
  • रूर नदी के निकटवर्ती क्षेत्रों से कोयले का खनन होता है और जहाजों के माध्यम से औद्योगिक नगरों तक पहुँचाया जाता है। इसलिए इस
  • नदी को कोयला ढोने वाली नदी कहा जाता है।
  • इसके निकट अनेक औद्योगिक नगरों का विकास हुआ है। इसलिए इस नदी को जर्मनी एवं यूरोप महाद्वीप के औद्योगिक हृदय स्थल वाली नदी के उपनाम से जानते हैं।
राइन नदी के किनारे स्थित प्रमुख नगर
*राइन नदी के किनारे स्थित प्रमुख नगर*
क्र.सं. देश राजधानियाँ
1 स्विट्ज़रलैंड बेसेल
2 फ्रांस स्ट्रॉसबर्ग
3 जर्मनी बॉन, कोलोन व डसेलडार्फ
4 हॉलैंड/नीदरलैंड रोटर्डम बंदरगाह

सेन/सीन नदी

इसका उद्गम फ्रांस देश में मैसिफ सेंट्रल पठार से होता है यह नदी फ्रांस की राजधानी पेरिस एवं ली-हार्वे नगर से बहने के बाद इंग्लिश चैनल में जाकर गिर जाती है।

पो नदी

यह इटली देश की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। इसे इटली की गंगा के उपनाम से जाना जाता है। इसका उद्गम आल्प्स पर्वत से होता है इसके किनारे इटली देश का ट्यूरिन सागर स्थित है। अंततः यह नदी एड्रियाटिक सागर में जाकर गिरती है।

यूराल नदी

यह नदी यूराल पर्वत से उद्गम होने के बाद यूरोप व एशिया के मध्य सीमा बनाते हुए कैस्पियन सागर/झील में जाकर गिर जाती है।

वोल्गा नदी


* यूरोपीय रूस के क्षेत्र में वलदाई की पहाड़ियों से वोल्गा नदी का उद्गम होता है।
* यह नदी यूरोप महाद्वीप की सबसे लंबी नदी है।
* यह नदी यूरोपीय रूस के क्षेत्र में बहने के बाद कैस्पियन सागर/झील में जाकर गिर जाती है।


ओडर नदी


* इसका उद्गम चेक गणराज्य देश में से होता है।
* इसके बाद यह नदी पोलैंड व जर्मनी के मध्य सीमा बनाते हुए बाल्टिक सागर में जाकर गिर जाती है।


एल्ब नदी

* इसका उद्गम चेक गणराज्य में क्रकोनोस पर्वत से होता है।
* यहाँ से चेक गणराज्य तथा जर्मनी के ड्रेसडेन व हैम्बर्ग नगरों से बहने के बाद उत्तरी सागर में जाकर गिर जाती है।
* ड्रेसडेन नगर-जर्मनी देश का ड्रेसडेन नगर चीनी मिट्टी के बर्तनों हेतु विश्व प्रसिद्ध है।

वेसर नदी


* मध्यवर्ती जर्मनी की उच्चभूमि से वेरा व फलडा नदियों के रूप में वेसर नदी का उद्गम होता है।
* वेसर नदी के किनारे जर्मनी का ब्रेमेन नगर स्थित है।
* अंततः यह नदी उत्तरी सागर में जाकर गिर जाती है।


टाइबर नदी


* इटली की एक नदी एपेनाइन पर्वत से निकलकर भूमध्य सागर में गिरती है।
* रोम इसके मुहाने पर स्थित है।
* वेटिकन सिटी इसके किनारों पर स्थित है।


टेम्स नदी


* इसका पुराना नाम टेमेसिस है।
* यह नदी यूनाइटेड किंगडम के टेम्स हैड झरने से निकलकर उत्तरी सागर में गिरती है।
* लंदन तथा ऑक्सफोर्ड नगर इसी के किनारे स्थित हैं।
* लंदन तक यह नदी नौगम्य है।

रोन नदी


* यह नदी स्विट्जरलैंड के आल्पस पर्वत से निकलकर जेनेवा झील से बहती हुई भूमध्य सागर में स्थित लायन्स की खाड़ी में गिरती है।
* इसकी मुख्य सहायक नदी साओन है।
* फ्रांस का लियोन शहर इसी के तट पर बसा है, जो रेशम के लिए विख्यात है तथा जिसे “विश्व की रेशम की राजधानी” कहा जाता है।

 

डॉन नदी

  • यह पश्चिम रूस के टुला से निकलकर एजोब सागर में गिरती है। डॉन नदी को वोल्गा नदी से नहर द्वारा जोड़कर यूरोप का प्रमुख नहरतंत्र विकसित किया गया है।
  • eरूस का रोस्तोव पत्तन नगर इसी नदी के तट पर स्थित है।

विस्तुला नदी

इसका उद्गम पॉलेण्ड देश के बरानिया गौरा पर्वत चोटी से होता है। पौलेण्ड की राजधानी वारसा में बहकर बाल्टिक सागर में गिरती है।

ऑस्ट्रेलिया

मरे व डार्लिंग नदियाँ

  • इन दोनों नदियों का उद्गम ऑस्ट्रेलिया देश के पूर्वी भाग में स्थित ग्रेट डिवाइडिंग रेंज पर्वत से होता है।
  • मरें व डार्लिंग दोनों नदियाँ न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया व दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया प्रांत में बहने के बाद स्पेंसर की खाड़ी में गिरती हैं।
  • डार्लिंग नदी के किनारे ऑस्ट्रेलिया का सिडनी नगर स्थित है।
  • मरें व डार्लिंग नदियों के मध्य घासभूमि डाउन्स घासभूमि कहलाती है।
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