अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग
- जलमार्ग के माध्यम से होने वाले परिवहन को जल परिवहन या जलमार्ग कहते है।
- जल यातायात प्राचीन काल में भी एक महत्त्वपूर्ण इकाई थी। जिसके माध्यम से मानव अपना सामान ढोने तथा यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए नदियों, झीलों, नहरों एवं समुद्रों का प्रयोग करता आया है।
- जल परिवहन एक सस्ता माध्यम है, क्योंकि स्थल तथा वायु की अपेक्षा जल का घर्षण कम होता है। अतः जल परिवहन की ऊर्जा लागत भी कम होती है।
जलमार्ग परिवहन दो प्रकार के होते हैं –
- I. महासागरीय परिवहन
- II. आंतरिक जलमार्ग
I. महासागरीय परिवहन –
- वर्तमान युग में महासागर परिवहन तथा व्यापार का प्रमुख साधन है जो महासागर प्राचीन काल में विभिन्न स्थलीय भागों को एक-दूसरे से पृथक् करते थे, वहीं महासागर आज के युग में विश्व के विभिन्न स्थलीय प्रदेशों को एकसूत्र में बाँधने की महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
- निम्नलिखित कारणों से महासागरीय परिवहन बहुत ही सस्ता तथा सुविधाजनक परिवहन हैं-
- बंदरगाहों तथा जहाजों के निर्माण के लिए प्रारंभिक खर्च अधिक होता है, इसके रख-रखाव में बहुत कम खर्च होता है।
- जलयान किसी भी दिशा में स्वतंत्र रूप से जा सकते हैं।
- इनमें किसी मार्ग के नियमों की आवश्यकता नहीं होती। महासागरीय जलमार्ग के दोनों सिरों पर पत्तन की सुविधा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त है।
- नश्वर, शीघ्र खराब हो जाने वाली वस्तुओं; जैसे मांस, फल, सब्जी एवं दुग्ध पदार्थों आदि के परिवहन हेतु प्रशीतित कक्षों, टैंकरों तथा दूसरे विशिष्ट जहाजों के विकास से समुद्री परिवहन की क्षमता में अधिक सुधार आया है।
- कंटेनरों के प्रयोग से न सिर्फ माल को चढ़ाना-उतारना सरल हो गया है, अपितु संसार के प्रमुख पत्तनों पर इन सामानों को स्थल परिवहन हेतु रेल या सड़क मार्ग पर बदलने में भी सुविधा होती है।
- आधुनिक यात्री जहाज और मालवाहक जहाजों को रडार, वायरलेस तथा अन्य नौचालन सुविधाओं तथा उपकरणों से सुसज्जित कर दिया गया है। अतः वे तूफान और खराब मौसम में भी बहुत कम बाधित होते हुए निर्धारित मध्यम गति से समुद्र का पार करते हुए निश्चिम समय पर गंतव्य स्थल पर पहुँच सकते हैं।
- महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों के नाम –
1.उत्तरी अटलांटिक मार्ग
- भूमध्य सागर तथा हिंद महासागर का मार्ग CO
- आशा अंतरीप मार्ग
- दक्षिणी अटलांटिक मार्ग
- उत्तर प्रशांत मार्ग
- दक्षिणी प्रशांत मार्ग
- 1. उत्तरी अटलांटिक मार्ग
- 2.यह यूरोप के पश्चिमी तट के पत्तन को उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट के पोताश्रय से जोड़ती है।
- यूरोप के पश्चिमी तट के पत्तन बड़ी मात्रा में रसायन, मशीन, इस्पात, खाद तथा शराब संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा को निर्यात करते हैं जबकि उत्तरी अमेरिका के पूर्वी पत्तन यूरोपीय देशों को खाद्य सामग्री गेहूँ, पशुओं का चारा, तम्बाकू, कागज तथा लुग्दी तथा इमारती लकड़ी और धातु जैसे-ताँबा, निकेल आदि निर्यात करते हैं।
- यह विश्व का व्यस्ततम सामुद्रिक मार्ग है क्योंकि यह मार्ग विश्व के दो बड़ औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है। विश्व के व्यापारिक जलपोतों के कुल टन भार का एक-चौथाई टन भार इस मार्ग से होता है।
- उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट पर अवस्थित प्रमुख पत्तन – बोस्टन, न्यूयॉर्क, फिलाडेल्फिया, मॉण्ट्रियल, क्यूबेक, हैलीफैक्स, सेन्ट जॉन्स।
- यूरोप के पश्चिमी तट पर अवस्थित प्रमुख पत्तन ग्लास्गो, लिवरपुल, मैनचेस्टर, साउथ हैम्पटन, लंदन, रॉटरडम, हैम्बर्ग, ब्रेमेन, एण्टवर्प, लाहावरे, लिस्बन।
2.भूमध्य सागर तथा हिंद महासागर का मार्ग
- यह मार्ग पश्चिम में यूरोप के उन्नत देशों को पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण एशिया तथा पूर्वी एशिया के विकासशील देशों से भूमध्य सागर, लाल सागर तथा हिंद महासागर द्वारा जुड़ता है।
- यूरोप से पूर्वी अफ्रीका, एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया को जाने वाले लगभग सभी जलयान इस मार्ग को अपनाते हैं। पूर्व की ओर जाने वाले माल में मुख्य रूप से मशीन तथा औद्योगिक उत्पाद होते हैं।
- पश्चिम की ओर कृषि उत्पाद; जैसे-कपास, रबड़, चाय, कहवा, चीनी और खनिज तेल भेजे जाते हैं। इस मार्ग पर पोर्ट सईद, अदन, मुंबई, कोच्चि, कोलंबो और सिंगापुर आदि कुछ महत्त्वपूर्ण पत्तन स्थित हैं।
3. आशा अंतरीप मार्ग (केप ऑफ गुड होप मार्ग)
- यह जलमार्ग स्वेज नहर का वैकल्पिक मार्ग था। यह मार्ग पूरे अफ्रीका का चक्कर काटता है और बहुत ही लम्बा है। उदाहरणतः लिवरपूल तथा कोलंबो के बीच इस मार्ग की लम्बाई, स्वेज मार्ग की तुलना में 6,400 किमी, अधिक है। इसलिए अधिकांश जलयान इसका प्रयोग नहीं करते। सन् 1967 में स्वेज नहर के बंद हो जाने से इस मार्ग का महत्त्व बढ़ गया था।
- वैसे भी बड़े-बड़े जहाज जो स्वेज नहर को पार नहीं कर सकते, अब भी इस मार्ग से होकर जाते हैं। कुछ जहाज स्वेज नहर के भारी कर से बचने के लिए भी यहीं मार्ग अपनाते हैं। यह मार्ग पश्चिमी यूरोप को पश्चिमी अफ्रीका के देशों, दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड से मिलाता है।
यूरोप से आने वाले अधिकतर जहाज सीधे आशा अंतरीप पहुँचते है। हाल में स्वतंत्रता प्राप्त अफ्रीकी राष्ट्रों में तीव्र आर्थिक विकास हो रहा है। मूल्यवान खनिजों; जैसे-सोना, ताँबा, हीरे-जवाहरात, टिन, क्रोमियम और अभ्रक तथा कृषि उत्पादों; जैसे-कपास, ताड़-तेल, मूँगफली, कहवा और फल में वृद्धि होने से अफ्रीका के पूर्वी और पश्चिमी तट पर स्थित पत्तनों द्वारा आशा अंतरीप से होकर जाने वाले यातायात की मात्रा बढ़ी है।
4. दक्षिणी अटलांटिक मार्ग
- यह जलमार्ग पश्चिम यूरोपीय तथा पश्चिम अफ्रीकी देशों का संबंध दक्षिण अमेरिका में स्थित ब्राजील, अर्जेंटीना तथा उरुग्वे के पत्तनों के साथ स्थापित कराता है।
- ‘इस मार्ग का महत्त्व उत्तर अटलांटिक मार्ग की अपेक्षा कम है, क्योंकि दक्षिण अटलांटिक महासागर के दोनों तटों पर स्थित अफ्रीकी तथा दक्षिण अमेरिकी देशों में जनसंख्या विरल है और इनका आर्थिक विकास अधिक नहीं है। केवल दक्षिण-पूर्वी ब्राजील, प्लाटाज्वारनद मुख और दक्षिणी अफ्रीका के कुछ क्षेत्र ही औद्योगिक दृष्टि से विकसित हैं।
- दक्षिण अमेरिका के रियो डि जेनेरियो और अफ्रीका के केपटाउन के बीच पूर्व-पश्चिम मार्ग पर भी व्यापार अधिक नहीं होता क्योंकि इन दोनों क्षेत्रों के संसाधन तथा उत्पाद लगभग एक समान हैं।
- ब्राजील से कहवा, कोको, अर्जेंटाइना से गेहूँ, मांस, ऊन और सन उत्तरी अमेरिका तथा यूरोप के औद्योगिक प्रदेशों को भेजे जाते हैं। बदले में निर्मित और अर्द्ध निर्मित वस्तुएँ मँगवाई जाती हैं।
5. उत्तरी प्रशांत मार्ग
- विशाल प्रशांत महासागर के आर-पार कई मार्गों से व्यापार होता है। लगभग सभी मार्ग होनोलुलू पर मिलते हैं। यहाँ पर जलयान मरम्मत तथा ईंधन के लिए रुकते हैं। उत्तर में वृहत् वृत्त (वह वृत्त जो ग्लोब को दो बराबर भागों में बाँटता है) पर एक सीधा मार्ग बैंकूवर तथा योकोहामा को जोड़ता है, जिससे यात्रा की दूरी लगभग आधी रह जाती है।
- अमेरिकी तट पर इस मार्ग के प्रमुख पत्तन बैंकूवर, सियाटिल, पोटलैंड, सेन फ्रांसिस्को, लॉस एंजिल्स हैं। इन पत्तनों से गेहूँ, लकड़ी, कागज, लुगदी, मत्स्य, दुग्ध उत्पाद, निर्मित वस्तुओं आदि का व्यापार होता है। इन वस्तुओं को 7,200 किमी. चौड़े प्रशांत महासागर के पार एशियाई तट तक ले जाया जाता है।
- एशियाई तट पर इन वस्तुओं के गंतव्य पत्तन योकोहामा, कोबे, शंघाई, गुआनजाऊ (कॅटन) हॉन्गकॉन्ग, मनीला, सिंगापुर हैं। इन पत्तनों से मुख्यतः औद्योगिक उत्पादों; जैसे-वस्त्र, विद्युत उपकरण और दक्षिण-पूर्व एशिया से उष्णकटिबंधीय कच्चे माल; जैसे-रबड़, नारियल-गरी, ताड़-तेल और टिन का निर्यात होता है।
6. दक्षिण प्रशांत मार्ग
इस मार्ग पर चलने वाले जलयान पनामा नहर में से गुजरते हैं जो उत्तरी अमेरिका और पश्चिम यूरोप का ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड तथा बिखरे हुए प्रशांत महासागरीय द्वीपों के बीच संपर्क स्थापित करते हैं।
- इस मार्ग द्वारा जलयान हॉन्गकॉन्ग, फिलीपींस तथा इंडोनेशिया भी जाते हैं।
- यह मार्ग मुख्यतः गेहूँ, मांस, ऊन, फल, दुग्ध उत्पादों तथा औद्योगिक उत्पादों को परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराता है। इस मार्ग पर चलने वाले जलयानों को अत्यधिक दूरी तय करनी पड़ती है।
- उदाहरणतः पनामा तथा वेलिंगटन के बीच की दूरी 10, 380 किमी. है और पनामा से सिडनी 12,280 किमी. दूर है परन्तु ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को उत्तरी अमेरिका से व्यापार करने का और कोई विकल्प नहीं है।
नहर जलमार्ग
स्वेज नहर
- स्वेज नहर का निर्माण स्वेज जलडमरुमध्य को काटकर किया गया है।
- इसके निर्माण का कार्य सन् 1854 में एक फ्रांसीसी इंजीनियर फर्डिनेण्ड-द-लेपेप्स को सौपा गया और यह नहर सन् 1869 में बनकर तैयार हो गई।
- जब नहर बनाई गई तब 164 किमी. लंबी और 8 मीटर गहरी थी। कई विस्तारों के बाद (2015 से) वर्तमान में यह 193.30 किमी. (120.11 एनएम) लंबा, 24 मीटर (79 फीट) गहरा और 205 मीटर (673 फीट) चौड़ा है।
- यह नहर पश्चिम में भूमध्य सागर को पूर्व में लाल सागर से मिलाती है। भूमध्य सागर की ओर पोर्ट सईद तथा लाल सागर की ओर पोर्ट स्वेज इसके दो सिरे हैं।
- यह नहर ग्रेट बियर झील, लिटिल झील तथा टिमसा झीलों में से होकर गुजरती है। ये सभी खारे पानी की झीलें हैं। इस नहर के साथ-साथ एक रेलवे मार्ग भी है और इसके पश्चिमी किनारे पर इस्लामिया नगर है।
- स्वेज नहर यातायात और नौचालन में मानव की सफलता का एक महत्त्वपूर्ण प्रमाण है।
- इस नहर के निर्माण से एक ओर यूरोप के देशों तथा दूसरी ओर अफ्रीका के पूर्वी देशों, दक्षिण-पूर्वी एशिया और सुदूर पूर्व के बीच छोटा मार्ग खुल गया, जिससे दूरी, समय तथा व्यय में आश्चर्यजनक कमी हुई है।
- पहले जहाजों को अफ्रीका का पूरा चक्कर काटकर आशा अन्तरीप समुद्री मार्ग से जाना पड़ता था, परंतु अब स्वेज नहर से सीधे ही छोटे मार्ग द्वारा चले जाते हैं। उदाहरणतः आशा अन्तरीप मार्ग की तुलना में स्वेज मार्ग से लंदन एवं मुंबई के बीच 9,600 किमी. लिस्बन एवं मकाओं के बीच 5,120 किमी. की दूरी कम हुई है।
- इस नहर से प्रतिदिन लगभग 90 से 110 जहाज पार कर सकते हैं।
- इस नहर के निर्माण से यूरोपीय देशों विशेषतः ब्रिटेन को बहुत लाभ हुआ। इसलिए इस नहर को ब्रिटेन की स्नायु-नाड़ी माना जाता था।
- इस नहर से लाभ उठाने वाले अन्य देश फ्रांस, इटली, हॉलैण्ड, स्वीडन, डेनमार्क तथा जर्मनी हैं। इस नहर के पूर्व की ओर लाभउठाने वाले अफ्रीकी-एशियाई देश, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड हैं।
- स्वेज नहर के पश्चिम में लंदन, लिवरपुल, हेम्बर्ग, मैनचेस्टर, साउथ हैम्पटन, लिस्बन, नेपल्स, जिब्राल्टर तथा सिकन्दरिया प्रमुख बंदरगाह हैं।
- पूर्व की ओर स्थित प्रमुख बंदरगाहों के नाम स्वेज, अदन, कराची, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, कोलम्बो, रंगून, सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग, जकार्ता, मेलबर्न, सिडनी, पर्थ, एडिलेड एवं विलिंगटन हैं।
- पश्चिम से पूर्व को निर्मित माल; जैसे-मशीनें, कपड़ा, दवाइयाँ तथा रासायनिक पदार्थ भेजे जाते हैं। इसके बदले में पूर्वी प्रदेश पश्चिमी भागों को कच्चा माल; जैसे-पटसन, गेहूँ, रेशम, चाय, हैम्प, नारियल, ऊन, मांस, चीनी, टिन, रबर तथा गर्म मसाले भेजते हैं।
पनामा नहर
- यह नहर उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के बीच पनामा गणराज्य के पनामा जलडमरुमध्य को काटकर बनाई गई है।
- यह विश्व के दो बड़े महासागरों प्रशांत व अटलांटिक को मिलाती है।
- इसका निर्माण संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सन् 1906 में शुरू किया गया और सन् 1914 में यह नहर बनकर तैयार हो गई।
- इस नहर के अटलांटिक तट की और कोलन बंदरगाह तथा प्रशांत महासागर तट पर पनामा बंदरगाह स्थित है। इसकी लम्बाई 82 किमी., चौड़ाई 90 मीटर तथा गहराई 12.5 से 26 मीटर तक है।
- पनामा नहर ऊँचे-नीचे पहाड़ी इलाकों को काटकर बनाई गई है और इसका तल समुद्र तल से 25.6 मीटर ऊँचा है, इसलिए इसमें जल द्वार प्रणाली (Lock System) का प्रयोग किया जाता है। इसे पार करने के लिए 7 से 8 घंटे का समय लगता है।
- इस नहर में से प्रतिदिन 48 जहाज गुजरते हैं।
- पनामा नहर को बनाने से पहले जहाजों को केप हॉर्न के खतरनाक मार्ग से होकर जाना पड़ता था। इस नहर के बन जाने से ऑकलैंड से न्यूयॉर्क के बीच 4,000 किमी. की दूरी की बचत हुई है। इसके द्वारा अटलांटिक और प्रशांत महासागरों के तटीय देशों के बीच व्यापार बहुत बढ़ गया है।
- इस नहर के निर्माण से अमेरिका के पश्चिमी तट पर सैन फ्रांसिस्को तथा यूरोप के लिवरपुल के बीच 8,000 किमी. की दूरी कम हुई है।
- इस नहर द्वारा कैलिफोर्निया से पेट्रोल, चिली से शोरा तथा ताँबा, चीन से चाय तथा रेशम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से मांस, मक्खन, पनीर तथा चमड़ा, पूर्वी अमेरिका से तैयार माल, कपड़ा, मशीनें, दवाइयाँ आदि महासागरीय देशों को भेजी जाती है।
कील नहर
- यह नहर उत्तरी सागर व बाल्टिक सागर को आपस में जोड़ती है।
- इस नहर का निर्माण जर्मनी ने अपने देश भूमि को काटकर किया।
- इस नहर की लंबाई 99 किमी. है।
- इस नहर के बन जाने से उत्तरी सागर व बाल्टिक सागर के मध्य की दूरी 600 किमी. कम हो गई।
- इस नहर का निर्माण कार्य सन् 1895 में पूर्ण कर लिया गया था और इस नहर का नाम ‘केसर-विल्हेम’ नहर रखा गया जिसे सन् 1948 में ‘कील नहर’ नाम दिया गया।
सू/सेंट मेरी नहर
- यह सुपीरियर झील को ह्यूरन झील से जोड़ती है।
ईरी नहर
- यह नहर ह्यूरन झील को ईरी झील से जोड़ती है।
वैलेण्ड नहर
- यह नहर ईरी झील को ऑटेरिया झील से जोड़ती है।
मैनचेस्टर जहाजी नहर
यह इंग्लैंड में मैनचेस्टर को इस्थम से मिलाती है।
बकिंघम नहर
- यह नहर राष्ट्रीय जलमार्ग 4 का एक भाग है।
- यह नहर आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु राज्यों के मध्य में स्थित है।
उत्तरी सागर की नहर
- यह उत्तरी सागर को एम्सटर्डम से जोड़ती है।
नवीन जलमार्ग नहर
- उत्तरी सागर और रॉटरडम के मध्य मध्य स्थित है।
स्टैलिन नहर
- इसे वोल्गा डॉन नहर भी कहते हैं, जो स्वतंत्र देशों के राष्ट्रकुल में रोस्टोव एवं स्टालिनग्राड को जोड़ती है।
गोटा नहर
- स्वीडन में स्टॉकहोम और गोटेबर्ग के मध्य स्थित है।
राइन-मेन-डेन्यूब नहर
यह उत्तरी सागर को काला सागर से जोड़ती है।
वोल्गा नहर प्रणाली
- यह विश्व की सबसे बड़ी नहर प्रणाली है।
- यह 11,200 KM. नौगम्य जलमार्ग है। यह वोल्गा-डॉन नहर को काला सागर तक नौ-परिवहन संभव करवाती है।
सेंट लॉरेंस जलमार्ग
- यह जलमार्ग ग्रेट लेवस से जुड़ा होने के कारण 3760 KM. दूरी तक आंतरिक भागों में समुद्री जहाजों का यातायात सुगम बनाता है।
निकारगुआ नहर
- इस नहर का निर्माण 22 दिसम्बर, 2014 को प्रारंभ हुआ।
- यह नहर अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ने वाली अन्तरमहाद्वीपीय नहर है।
- यह नहर वेनोडो द्वीप पर ब्रिटो बंदरगाह प्रशांत महासागर में स्थित है। जिसकी लम्बाई 278 किमी. है।
- निकारगुआ झील मध्य अमेरिका की ताजे पानी सबसे बड़ी स्रोत है।
2 .आंतरिक जलमार्ग –
- नदियों, झीलों तथा नहरों का प्रयोग करने वाले जलमार्गों को आंतरिक जलमार्ग कहते हैं।
- प्राचीनकाल में आंतरिक जलमार्गों का बड़ा महत्त्व होता था, परन्तु रेलों तथा सड़कों के बनने से इनका महत्त्व कुछ कम हो गया है।
आन्तरिक जलमार्गों के विकास की आवश्यक दशाएँ-
- नदियाँ बारहमासी होनी चाहिए। जिन नदियों में जल केवल वर्षा ऋतु
- में ही भरता हैं उनका प्रयोग वर्षभर जलमार्गों के रूप में नहीं किया जा सकता।
- नदियों का मार्ग जल-प्रपातों, सोपानी प्रपातों, क्षिप्तिकाओं तथा महाखड्डों से मुक्त होना चाहिए, जिससे नदी का मार्ग सुव्यवस्थित ढंग से नौका चलाने योग्य हो सके। नदियों में विसर्प भी कम होने चाहिए, जिससे सीधा जलमार्ग प्राप्त हो सके।
- नदियों के मुहाने साफ रहने चाहिए, ताकि समुद्र यातायात से आंतरिक यातायात को जोड़ा जा सके।
- शीतकाल में नदियाँ बर्फ से मुक्त रहनी चाहिए।
आंतरिक जलमार्गों के गुण-
- यातायात के सभी साधनों से जलमार्ग सस्ते तथा सुगम होते हैं। भारी, सस्ती तथा अधिक स्थान घेरनेवाली वस्तुओं; जैसे- कोयला, लोहा, लकड़ी आदि को ढोने का सबसे सस्ता साधन है।
- रेल एवं सड़क यातायात की भाँति जल यातायात में विशेष मार्ग बनाने की आवश्यकता नहीं होती।
- घने वनों में नदियाँ ही परिवहन का एक मात्र साधन हैं।
आंतरिक जलमार्गों के दोष-
आंतरिक जलमार्ग मंद गति के होने के कारण परिवहन में अधिक समय लगता हैं। अंतः शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं एवं यात्रियों को ले जाने में इनका कोई विशेष महत्त्व नहीं हैं।
- अधिकांश नदियाँ यातायात की माँग वाले क्षेत्रों से दूर बहती हैं और यातायात के लिए उनका लाभ नहीं उठाया जा सकता।
- कई नदियों को यातायात के योग्य बनाने के लिए उनके तले से रेत, मिट्टी आदि निकालनी पड़ती है या नहरें तथा जल अवरोध बनाने पड़ते हैं, जिससे रख-रखाव का व्यय बढ़ जाता है।
- नदियों में बाढ़ आने या कम वर्षा से जल-तल में परिवर्तन आने से जल-परिवहन में बाधा पड़ती है।
आंतरिक जलमार्गों का विश्व वितरण –
विश्व के प्रमुख आंतरिक जलमार्ग निम्नलिखित क्षेत्रों में पाए जाते हैं-
1. उत्तरी अमेरिका –
उत्तरी अमेरिका में आंतरिक जलमार्ग निम्नलिखित हैं-
ग्रेट लेक्स-सेंट लॉरेंस जलमार्ग-
- उत्तरी अमेरिका की ग्रेट लेक्स को सेंट लॉरेंस नदी से मिलाकर विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण आंतरिक जलमार्ग का निर्माण किया गया है।
- वृहत् झीलों में सुपीरियर, मिशीगन, ह्यूरॉन, ऑटेरियो तथा ईरी सम्मिलित हैं।
- वृहत् झील-सेंट लॉरेंस जलमार्ग के निर्माण से वृहत् झील क्षेत्र का महत्त्व बहुत बढ़ गया है।
- इस जलमार्ग पर भारी वस्तुएँ बहुत ही कम भाड़े पर ढोई जाती हैं।
- जलयान समुद्र तट से 3,760 किमी. की दूरी तक आ सकते। इस महान् आंतरिक जलमार्ग पर बंदरगाहें तट की बंदरगाहों की भाँति ही विकसित हो गई हैं।
- वृहत् झीलों के निकटवर्ती क्षेत्र कृषि, वन तथा खनिज संसाधनों की दृष्टि से बहुत ही समृद्ध क्षेत्र हैं और यहाँ पर उद्योगों का विस्तार बड़े पैमाने पर हुआ है।
- इन कारणों से यह विश्व का सबसे महत्त्वपूर्ण आंतरिक जलमार्ग बन गया है।
- झीलों को आपस में मिलाने के लिए नहरों का निर्माण किया गया है।
मिसिसिपी नदी तंत्र-
- उत्तरी अमेरिका का दूसरा महत्त्वपूर्ण आंतरिक जलमार्ग मिसिसिपी नदी तंत्र का है इसमें मुख्य मिसीसिपी तथा इसकी सहायक नदियाँ (ओहियो, इलीनायस, मिसौरी तथा रेड रिवर) सम्मिलित हैं।
- मिसीसिपी नदी में इसके मुहाने से लेकर सेंट पॉल तक 3,500 किमी. की दूरी तक जहाज जा सकते हैं।
- मिनियापोलिक तक बड़े जहाज जा सकते हैं।
- मिसिसिपी तथा ओहियो नदियों को वृहत् झीलों के साथ नहरों द्वारा मिलाया गया है।
- मोनन्गाहेला सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली नदी है।
- मिसौरी नदी मुख्य मिसीसिपी नदी के साथ सेन्ट लुई स्थान पर मिलती है और यह रॉकी पर्वत के गिरीपद तक यातायात के लिए प्रयोग की जाती है।
- मिसिसिपी नदी तथा वृहत् झीलों के बीच इलीनायक नदी एकमात्र कड़ी है। यह जलमार्ग उत्तरी अमेरिका के आंतरिक भागों को मैक्सिको की खाड़ी के साथ मिलता है इस जलमार्ग पर कोयला, पेट्रोलियम तथा इनसे निर्मित वस्तुएँ ढोई जाती है।
- यूरोप
- फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैण्ड, यूनाइटेड किंगडम तथा यूरोपीय रूस में आंतरिक जलमार्ग विकसित अवस्था में है।
- राईन, रोन, सीन, म्यूस, वेरूर, एम्स, ओडर, डेन्यूब, नीपर, डॉन, वोल्गा आदि नदियों को आंतरिक जल परिवहन के लिए प्रयोग किया जाता है।
राईन-
- इस नदी में यूरोप का सबसे महत्त्वपूर्ण आंतरिक जलमार्ग विकसित किया गया है। यह विश्व की सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली नदी है।
- यह यूरोप के हृदय स्थल में बहती है और स्विट्जरलैण्ड, जर्मनी तथा नीदरलैण्ड को जल यातायात की सुविधा प्रदान करती है।
- यह उत्तरी सागर की रोटर्डम (नीदरलैंड) बंदरगाह से स्विट्जरलैंड के बासले तक 700 किमी. की दूरी के लिए नाव्य है।
- यह यूरोप के सबसे अधिक औद्योगीकृत तथा सबसे अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र को आंतरिक जल परिवहन की सुविधा प्रदान करती है। अतः यह विश्व का सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला आंतरिक जल मार्ग है। प्रतिवर्ष 20,000 से अधिक समुद्री जलयान तथा 2 लाख आंतरिक मालवाहक पोत वस्तुओं एवं सामग्रियों का आदान-प्रदान करते हैं।
- ऊपरी राईन में नीदरलैंड्स को रोटरडम तथा एन्टवर्प महत्त्वपूर्ण बंदरगाह है। राईन नदी को नहरों द्वारा रोन तथा डेन्यूब से मिलाया गया है। इस प्रकार उत्तरी सागर को आंतरिक जलमार्गों द्वारा भूमध्य सागर तथा काला सागर से मिलाया गया है।
- सीन, वेसर, एल्ब, ओडर तथा विस्तुला आदि नदियों को भी नहरों द्वारा राईन नदी से मिलाया गया है। राईन-रोन नहर राईन नदी को रोन नदी से मिलाती है। यह जलमार्ग यूरोपीय साझा बाजार के व्यापार की धुरी है।
डेन्यूब जलमार्ग-
- यह महत्त्वपूर्ण आंतरिक जलमार्ग पूर्वी यूरोपीय भाग को अपनी सेवाएँ प्रदान करता है।
- डेन्यूब नदी ब्लैक फॉरेस्ट से निकलकर अनेक देशों से होती हुई पूर्व की ओर बहती है।
- यह टारना सेविरिन तक नौकायन योग्य है।
- इस जलमार्ग का उपयोग करके मुख्य निर्यात किए जाने वाले पदार्थ गेहूँ, मक्का, इमारती लकड़ी तथा मशीनरी है।
वोल्गा-
पूर्वी यूरोप की मुख्य नाव्य नदियाँ वोल्गा, डॉन, नीपर, ड्वीना, नीस्तर आदि हैं। सबसे बड़ी 3,840 किमी. लम्बी वोल्गा नदी है, जो 11,200 किमी. लम्बा जलमार्ग उपलब्ध कराती है।
- वोल्गा नदी काले सागर में गिरती है जो स्थल से घिरा हुआ है इस कमी को काफी हद तक वोल्गा डॉन नहर से जोड़कर पूरा किया गया है।
- वोल्गा-डॉन नहर मॉस्को तथा पूर्वी यूक्रेन के बीच आंतरिक जल यातायात उपलब्ध कराती है।
- रूस में मास्को आंतरिक जल यातायात का केन्द्र बिन्दु है।
- वोल्गा नदी घनी जनसंख्या वाले औद्योगिक प्रदेश में प्रवाहित होती है और अपनी सहायक नदियों सहित रूस का आधा आंतरिक जल यातायात उपलब्ध कराती है।
- 3. एशिया –
- एशिया महाद्वीप के अन्य भार्गों की अपेक्षा चीन तथा भारत में आंतरिक जलमार्ग अधिक विकसित है।
चीन-
- चीन में कई बड़ी नदियाँ हैं परंतु उनमें से कुछ विशेषतः पूर्वी भाग की नदियों में ही जल परिवहन अधिक विकसित हुआ है। हुआंग तथा चांग जियांग नाव्य नदियाँ हैं।
- सघन जनसंख्या वाले सिचुआन प्रदेश को, यह प्रणाली चांग जियांग डेल्टाई क्षेत्र से जोड़ती है, जहाँ पर नहरों का सघन जाल बिछा हुआ है।
- इस जलमार्ग द्वारा समुद्री जहाज हैंकाऊ तक जा सकते हैं।
भारत-
- भारत में गंगा नदी पटना तक नाव्य हैं। सुंदरवन से होकर भारत और बांग्लादेश के मध्य नियमित रूप से स्टीमर चलते हैं।
- जिसके पश्चजल में अंतः स्थलीय जल परिवहन आज भी प्रगति कर रहा है। भारत की तटरेखा लंबी है। यात्रियों और माल के परिवहन के लिए तटीय सेवाएँ उपलब्ध है।\
4. दक्षिण अमेरिका
- दक्षिण अमेरिका में अमेजन तथा इसकी सहायक नदियों में लगभग 60 हजार किमी. लम्बे जलमार्ग है।
- इसमें समुद्री जहाज 1,600 किमी. अन्दर मनौस तक जा सकते हैं।
- छोटे-छोटे स्टीमर अटलांटिक तट से 3,680 किमी. दूर पेरु में स्थित इक्वीटास तक चलाए जा सकते हैं।
- कम जनसंख्या तथा निम्न आर्थिक स्तर के कारण इन जलमार्गों का अधिक उपयोग नहीं किया जाता।
पराना-परागुए जलमार्ग-
- यह दक्षिण अमेरिका की महत्त्वपूर्ण जल परिवहन प्रणाली है। इस नदी प्रणाली का जल रियो-डि-प्लाटा के ज्वारनदमुख से होकर अटलांटिक महासागर में गिरता है।
- इससे होकर बड़े जहाज आंतरिक भागों तक जा सकते हैं।
- पराना में 240 किमी. भीतर स्थित सांता फे तक समुद्री जहाज चलाए जा सकते हैं। परागुए में छोटे स्टीमर एसंशन तक पहुँचते हैं।
- इस जलमार्ग का यह सुविकसित पृष्ठ प्रदेश है और उपजाऊ आंतरिक भाग को अटलांटिक तट से जोड़ता है।
प्रमुख जलसंधियाँ
जिब्राल्टर जलसंधि
- यह जलसंधि उत्तरी अटलांटिक महासागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है।
- यह जलसंधि मोरक्को (अफ्रीका) देश को स्पेन (यूरोप) से अलग करती है।
- इसे भूमध्य सागर का प्रवेश द्वार कहा जाता है। (उपनाम से जानी जाती है।)
बाब अल मंदेव जलसंधि
- बाब अल मंदेव जलसंधि लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ती है।
- यह जिबूती (अफ्रीका) को यमन (एशिया) देश से अलग करती है।
- इस जलसंधि को “आँसुओं का द्वार” (Gate of Tears) के उपनाम से जाना जाता है।
मलक्का जलसंधि
- मलक्का जलसंधि सुमात्रा (इंडोनेशिया) को मलाया प्रायद्वीप (मलेशिया) से अलग करती है।
- मलवका जलसंधि बंगाल की खाड़ी को दक्षिण चीन सागर से जोड़ती है।
सुण्डा जलसंधि
- यह जलसंथि दक्षिण चीन सागर को हिंद महासागर से जोड़ती है।
- यह जलसंधि इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप को जावा द्वीप से अलग करती है।
- इसके क्षेत्र में विश्व का सबसे विस्फोटक एवं भयंकर ज्वालामुखी क्राकाताओं स्थित है।
बैरिंग जलसंधि
- यह जलसंधि आर्कटिक महासागर को उत्तरी प्रशांत महासागर से जोड़ती है।
- यह जलसंधि रूस से साइबेरिया को उत्तरी अमेरिका के अलास्का से अलग करती है।
- इस जलसंधि से होकर अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा गुजरती है।
- यह जलसंधि बैरिंग सागर को चुक्की सागर से जोड़ती है।
डेविस जलसंधि
- यह जलसंधि उत्तरी अटलांटिक को लेब्रेडोर सागर से जोड़ती है।
- यह ग्रीनलैण्ड द्वीप को बाफिन द्वीप (कनाडा) से अलग करती है।
- यह विश्व की सबसे चौड़ी जलसंधि है।
- इस जलसंधि से होकर लेब्रेडोर की ठंडी जलधारा प्रवाहित होती है।
पाक जलसंधि (जलडमरूमध्य)
- यह जलसंधि भारत को श्रीलंका से अलग करती है।
- यह जलसंधि बंगाल की खाड़ी को मन्नार की खाड़ी से जोड़ती है।
- यह जलसंधि बंगाल की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ती है।
- इस जलसंधि के क्षेत्र में सेतुसमुद्रम परियोजना प्रस्तावित है।
- पाक जलसंधि पर स्थित रामसेतु (द्वीप) में भारत की तरफ पंबन द्वीप है तथा श्रीलंका की तरफ तलाईमन्नार द्वीप स्थित है।
मैगेलन जलसंधि
मैगेलन जलसंधि तिएरा डेल फ्यूगो द्वीप को दक्षिण अमेरिका की मुख्यभूमि से अलग करती है।
- दक्षिण अटलांटिक महासागर को दक्षिणी प्रशांत महासागर से जोड़ती है।
डोवर जलसंधि
- यह जलसंधि यूनाइटेड किंगडम (UK) देश को फ्रांस से अलग करती है।
- यह जलसंधि उत्तरी सागर को इंग्लिश चैनल से जोड़ती है।
- डोवर जलसंधि के क्षेत्र में इंग्लिश चैनल की दूरी 35 किमी. है।
सुगारु जलसंधि
यह जापान से होकेडो द्वीप को होंशू द्वीप से अलग करती है।
- यह जलसंधि जापान सागर को उत्तरी प्रशांत महासागर से जोड़ती है।
फ्लोरिडा जलसंधि
यह जलसंधि USA के फ्लोरिडा प्रांत को क्यूबा द्वीप से अलग करती है।
- यह जलसंधि उत्तरी अटलांटिक महासागर को मैक्सिको की खाड़ी से आपस में जोड़ती है।
- नोट मैक्सिको की खाड़ी को कैरेबियन सागर से जोड़ने वाला चैनल यूकाटन चैनल है।
कुक जलसंधि
- यह जलसंधि न्यूजीलैण्ड के उत्तरी द्वीप को दक्षिणी द्वीप से अलग करती है।
- यह जलसंधि तस्मान सागर को दक्षिणी प्रशांत महासागर से जोड़ती है।
- नोट – फोबेआक्स जलसंधि न्यूजीलैण्ड के दक्षिण द्वीप को स्टीवर्ट द्वीप से अलग करती है।
मोजांबिक जलसंधि
यह जलसंधि मेडागास्कर देश को मोजांबिक देश से अलग करती है।
- इस जलसंधि से मोजांबिक गर्म जलधारा बहती है जो आगे चलकर मेडागास्कर के पूर्व की ओर से आने वाली मेडागास्कर जलधारा से मिलकर अगुलहास जलधारा का निर्माण करती है।
बॉस्फोरस जलसंधि
यह जलसंधि कालासागर को मारमरा सागर से जोड़ती है।
- यह जलसंधि यूरोपीय टर्की को एशियाई टर्की से अलग करती है।
हारमुज जलसंधि
- यह जलसंधि ईरान को ओमान देश से अलग करती है तथा ओमान की खाड़ी को फारस की खाड़ी से जोड़ती है।
- यह जलसंधि ईरान देश को संयुक्त अरब अमीरात देश से अलग करती है।
टौरस जलसंधि
टौरस जलसंथि आराफुआ सागर को कोरल सागर से जोड़ती है तथा पापुआ न्यू गिनी को ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि से अलग करती है।
बास जलसंधि
बास जलसंधि तस्मान सागर को दक्षिणी ऑस्ट्रेलियाई महासागर से जोड़ती है तथा तस्मानिया को ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि से अलग करती है।
हड़सन जलसंधि
- यह जलसंधि बाफिन द्वीप समूह को कनाडा की मुख्य भूमि से अलग करती है तथा हड़सन की खाड़ी को लेब्रेडोर सागर से जोड़ती है।
